Newzfatafatlogo

बांग्लादेश में शेख हसीना पर आरोप: 2013 की हिफाज़त रैली में हुई मौतों का मामला

बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और 40 अन्य के खिलाफ 2013 में ढाका में हुई हिफाज़त रैली के दौरान मौतों के मामले में आरोप दायर किए हैं। इस मामले में रैली के दौरान हुई हिंसा और उसके परिणामों की जांच की जा रही है। ट्रिब्यूनल ने फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। जानें इस विवाद के पीछे की कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 | 

बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री पर आरोप


नई दिल्ली: बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और 40 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ 2013 में ढाका में हिफाज़त रैली के दौरान हुई मौतों के मामले में औपचारिक आरोप लगाए हैं। अभियोजन पक्ष ने सोमवार को ट्रिब्यूनल के रजिस्ट्रार के समक्ष चार्जशीट पेश की।


मामले का विवरण

5 मई 2013 को हिफाज़त-ए-इस्लाम ने मध्य ढाका में 13-सूत्रीय मांगों के समर्थन में एक विशाल रैली का आयोजन किया था। उनकी मांग थी कि ईशनिंदा कानून को सख्त किया जाए। रैली के बाद, समूह ने सरकारी आदेश का पालन करने से इनकार करते हुए मोतीझील के शापला चत्तर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। इस दौरान हिंसा भड़क उठी।


इस्लामिक समूह ने बैतुल मुकर्रम मस्जिद परिसर में किताबों के स्टालों को आग के हवाले कर दिया, 30 बसों और 100 दुकानों में आग लगाई और बैरिकेड बनाने के लिए पेड़ काटे। पुराना पलटन में सरकारी दफ्तरों, बैंकों और कम्युनिस्ट पार्टी के दफ्तर को भी नुकसान पहुंचाया गया। उस समय मुख्य विपक्षी पार्टी BNP ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया था।


रात के समय, कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने प्रदर्शनकारियों को शहर से बाहर निकाल दिया। सरकार ने तब कहा था कि झड़पों और भगदड़ में 11 लोगों की मौत हुई, जिनमें 5 सुरक्षाकर्मी शामिल थे। हालांकि, मानवाधिकार समूह ओधिकार ने 58 मौतों का दावा किया और इसे नरसंहार करार दिया। HRW ने बड़े पैमाने पर हत्या से इनकार किया, लेकिन मौतों को स्वीकार किया। एमनेस्टी ने स्वतंत्र जांच की मांग की थी।


ट्रिब्यूनल की कार्यवाही

मुख्य अभियोजक अमीनुल इस्लाम ने बताया कि ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना और 40 अन्य के खिलाफ आरोपों पर संज्ञान लिया है। इनमें तत्कालीन सेना प्रमुख, राजनेता और सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं। ट्रिब्यूनल ने फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। 9 आरोपी पहले से जेल में हैं, जिनमें पूर्व मंत्री, सीनियर पुलिस अधिकारी और पत्रकार शामिल हैं।


जांच में यह पाया गया कि उस रात ढाका और चार अन्य जिलों में कार्रवाई के दौरान 58 लोग मारे गए थे। 78 वर्षीय हसीना वर्तमान में भारत में हैं। वह 5 अगस्त 2024 को छात्र आंदोलन के बाद अवामी लीग सरकार के गिरने पर देश छोड़कर भारत चली गई थीं। इसी ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2024 में उन्हें उस आंदोलन को दबाने के लिए 'इन एब्सेंशिया' मौत की सजा भी सुनाई थी।


ट्रिब्यूनल का इतिहास

यह ट्रिब्यूनल 2010 में हसीना सरकार द्वारा 1971 के मुक्ति संग्राम में पाकिस्तान का साथ देने वालों पर मुकदमा चलाने के लिए स्थापित किया गया था। बाद में मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने कानून में बदलाव कर अवामी लीग नेताओं पर मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप में मुकदमा चलाने की अनुमति दी। अब शापला चत्तर मामले की सुनवाई शुरू होगी। अभियोजन का कहना है कि यह मामला अभिव्यक्ति की आजादी और सरकारी कार्रवाई के बीच संतुलन का है।