बेंजामिन नेतन्याहू के पुराने अफेयर स्कैंडल पर रूथ बार का बड़ा खुलासा
नेतन्याहू का पुराना विवाद फिर से सुर्खियों में
नई दिल्ली: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक सफर से जुड़ा एक पुराना विवाद, जो लगभग तीन दशकों से चर्चा में है, एक बार फिर से सामने आया है। डॉ. रूथ बार ने हाल ही में इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और स्वीकार किया है कि उनका नेतन्याहू के साथ एक रिश्ता था। यह उल्लेखनीय है कि नेतन्याहू ने 1993 में लाइव टीवी पर इस रिश्ते को स्वीकार किया था।
1993 का विवाद और धमकी
यह मामला 1993 का है, जब नेतन्याहू लिकुड पार्टी के नेतृत्व की दौड़ में थे। 1992 के आम चुनाव में पार्टी की हार के बाद, पूर्व प्रधानमंत्री यित्झाक शामीर के उत्तराधिकारी का चयन किया जा रहा था। इसी दौरान, नेतन्याहू के घर एक फोन आया, जिसमें उनकी पत्नी सारा को बताया गया कि उनके पति का रूथ बार के साथ संबंध है। फोन करने वाले ने धमकी दी कि यदि नेतन्याहू ने नेतृत्व की दौड़ से अपना नाम वापस नहीं लिया, तो इस रिश्ते से जुड़ा एक कथित ऑडियो टेप सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
लाइव टीवी पर कबूलनामा
इस धमकी के बावजूद, नेतन्याहू ने पीछे हटने के बजाय एक ऐसा कदम उठाया, जिसने इजराइल में हलचल मचा दी। 14 जनवरी 1993 को, उन्होंने चैनल 1 के स्टूडियो में जाकर लाइव टेलीविजन पर अपनी पत्नी के प्रति बेवफाई की बात स्वीकार की। हालांकि, उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी डेविड लेवी का नाम नहीं लिया, लेकिन उन पर इस मामले में ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया। उनका यह सार्वजनिक कबूलनामा उस समय इजराइली राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया।
कथित ऑडियो टेप का रहस्य
जिस ऑडियो टेप की धमकी दी गई थी, वह कभी भी सामने नहीं आया। बाद में आई रिपोर्टों में कहा गया कि संभवतः ऐसा कोई टेप था ही नहीं, और नेतन्याहू पर दबाव बनाने के लिए केवल इसकी चर्चा की गई थी। इस विवाद के बावजूद, नेतन्याहू ने लिकुड पार्टी के नेतृत्व का चुनाव जीतने में सफलता प्राप्त की और बाद में इजराइल के प्रधानमंत्री बने।
रूथ बार का परिचय
उस समय रूथ बार का नाम पूरे इजराइल में चर्चा का विषय बन गया था। हालांकि, सोशल मीडिया के अभाव में विवाद के शांत होने के बाद वह धीरे-धीरे सार्वजनिक जीवन से दूर हो गईं। रिपोर्टों के अनुसार, रूथ पेशे से मनोवैज्ञानिक हैं और रणनीतिक सलाहकार के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं। उन्होंने इजराइल के कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं के साथ काम किया है और पर्यटन मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को भी सलाह दी है।
