ब्राजील में लूला दा सिल्वा की ऐतिहासिक जीत, ट्रंप के प्रभाव को चुनौती
लूला की पुनः चुनावी जीत
रविवार को ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने एक बार फिर से राष्ट्रपति पद पर जीत हासिल की, जो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आलोचकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है। ब्राजील के निर्वाचन न्यायालय ने 100 प्रतिशत मतगणना के बाद यह घोषणा की कि लूला ने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो पर लगभग 44 लाख वोटों की बढ़त बनाई है।
मतदान में अफरा-तफरी
यह घोषणा उस समय हुई जब मतदान केंद्रों पर शाम को हलचल मची थी। मतदान का समय समाप्त होने से पहले इसे दो घंटे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। हालांकि, बोल्सोनारो ने हार मानने से इनकार कर दिया और मतदान समय बढ़ाने के फैसले को अभूतपूर्व बताया।
लूला की जीत का महत्व
लूला की जीत लातिन अमेरिका में ट्रंप के साथ गठबंधन करने वाले दक्षिणपंथी नेताओं की बढ़ती संख्या के विपरीत है। इससे यह संकेत मिलता है कि मेक्सिको और ब्राजील जैसे बड़े देशों में वामपंथी नेता सत्ता में बने रहेंगे।
मतदान समय बढ़ाने की मांग
लूला ने साओ पाउलो और साल्वाडोर में मतदान केंद्रों तक पहुंचने में समस्याओं के कारण मतदान समय बढ़ाने की मांग की थी। वहीं, बोल्सोनारो ने दक्षिणी ब्राजील में भारी बारिश के कारण ऐसा करने का अनुरोध किया।
ब्राजील का राजनीतिक इतिहास
1985 में सैन्य तानाशाही के अंत के बाद यह पहला अवसर है जब पहले दौर में दूसरे स्थान पर रहने वाले उम्मीदवार ने राष्ट्रपति पद जीता है। लूला ने 2002 में पहली बार राष्ट्रपति पद जीता था और इसके बाद 2010 में भी दोबारा चुने गए।
लूला का राजनीतिक सफर
लूला ने 2018 में फिर से चुनाव लड़ने की कोशिश की, लेकिन उन्हें जेल भेज दिया गया था। 580 दिन बाद रिहा होने के बाद, उन्होंने बोल्सोनारो के खिलाफ चुनावी लड़ाई में वापसी की।
लूला की उम्र और राजनीतिक स्थिति
लूला अब ट्रंप और निकारागुआ के राष्ट्रपति डेनियल ओर्टेगा के साथ अमेरिका महाद्वीप के सबसे उम्रदराज राष्ट्रपतियों में शामिल हो गए हैं।
