ब्रिक्स समिट में पुतिन का भारत दौरा: वैश्विक राजनीति पर प्रभाव
दिल्ली में ब्रिक्स समिट की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल हो चुके हैं। उनका यह दौरा भारत-रूस संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी और पुतिन के बीच होने वाली मुलाकात में ऊर्जा, रक्षा और व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इस समिट के दौरान वैश्विक राजनीति पर भी गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है। जानें इस समिट के प्रमुख पहलुओं के बारे में।
| Sep 11, 2026, 11:17 IST
दिल्ली में ब्रिक्स समिट की तैयारियां
दिल्ली आज एक छावनी में तब्दील हो चुकी है, क्योंकि ब्रिक्स समिट के लिए सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस समिट में भाग लेने के लिए भारत में कदम रख लिया है। पुतिन के दिल्ली आगमन पर उनके सुरक्षा घेरे ने सभी को चौंका दिया। एयरपोर्ट पर केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह और अन्य नेताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। इस सम्मेलन में कई प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हो चुके हैं, जिनमें पुतिन और चीनी राष्ट्रपति जिंगपिंग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। जब भारत, रूस और चीन एक साथ आएंगे, तो अमेरिका जैसे देशों की चिंताएं बढ़ जाएंगी। यही कारण है कि जैसे ही ब्रिक्स देशों के नेता भारत पहुंचने लगे, डोनाल्ड ट्रंप की बेचैनी बढ़ गई।
पुतिन और मोदी की महत्वपूर्ण बैठक
आज पीएम मोदी और पुतिन के बीच मुलाकात होने वाली है। इस समिट में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और निवेश जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। यह पुतिन की रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पहली विदेश यात्रा है, और वह इस दौरान भारत आए हैं। पीएम मोदी और पुतिन के बीच भारत-रूस संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होने की उम्मीद है, जिसमें व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग शामिल हैं। यह दौरा 31 अगस्त को शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के बाद हो रहा है, जहां दोनों नेताओं ने राजनीतिक, व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और मोबिलिटी के क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी।
पुतिन का दौरा और वैश्विक संबंध
पुतिन का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और रूस अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने इस संबंध में बाधा डालने की कई कोशिशें की हैं। उन्होंने भारत को डराने और रूस से संबंध तोड़ने के लिए धमकियां दी हैं, लेकिन भारत और रूस के बीच संबंध लगातार मजबूत होते जा रहे हैं। पुतिन का यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यूक्रेन में चल रहे संघर्ष और पश्चिमी देशों की पाबंदियों के कारण रूस पर भूराजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने पहले ही कहा था कि दोनों देश रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग और भारत को सुखोई एसयू 57 स्टील फाइटर जेट बेचने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। इस दौरे के दौरान पुतिन और मोदी के बीच एक और द्विपक्षीय बैठक की उम्मीद है, जिसमें व्यापार और आर्थिक सहयोग पर चर्चा की जाएगी।
