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ब्रिटेन का सऊदी अरब को सैन्य सहायता: ऊर्जा सुरक्षा और जंग में उलझने का खतरा

ब्रिटेन ने सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने का निर्णय लिया है, जो हूती विद्रोहियों के खिलाफ सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह सहायता ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यूरोप की निर्भरता खाड़ी देशों पर बढ़ गई है। ब्रिटेन का यह कदम क्षेत्रीय तनाव को कम करने और ऊर्जा कीमतों को स्थिर रखने के प्रयास का हिस्सा है। हालांकि, इस सहयोग के साथ जंग में उलझने का खतरा भी है, जिससे ब्रिटेन को सावधान रहना होगा।
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अमेरिका की मदद की कमी

ईरान के खिलाफ संघर्ष में अमेरिका ने फ्रांस, ब्रिटेन और इटली जैसे यूरोपीय देशों से सहायता मांगी, लेकिन किसी ने भी डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का खुलकर समर्थन नहीं किया। सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ मदद की गुहार लगाई, लेकिन उसे कोई ठोस सहायता नहीं मिली। हालांकि, रियाद को फ्रांस और ब्रिटेन से कुछ सैन्य सहायता प्राप्त हो रही है, और ब्रिटेन यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ अधिक सक्रिय भूमिका निभा रहा है.


ब्रिटेन का डिफेंसिव सपोर्ट

सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद, ब्रिटेन ने रियाद को डिफेंसिव मिलिट्री सपोर्ट देने का निर्णय लिया। पिछले हफ्ते, ब्रिटेन के रक्षा सचिव वेस स्ट्रीटिंग ने इस सहायता को मंजूरी दी। उन्होंने कहा, 'सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमले बहुत गंभीर हैं, विशेषकर रियाद के एयरपोर्ट को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि स्थिति कितनी बिगड़ चुकी है।'


उन्होंने आगे कहा, 'मैंने यूके मिलिट्री सपोर्ट को और मंजूरी दे दी है। आरएएफ टाइफून सऊदी एयरस्पेस को ड्रोन और मिसाइलों से बचाने के लिए डिफेंसिव एयर मिशन उड़ाएंगे। यह हूती हवाई हमलों से सुरक्षा के लिए पहले से मौजूद यूके उपकरणों और कर्मियों पर आधारित है।'


ब्रिटेन की सहायता का स्वरूप

ब्रिटेन का सैन्य समर्थन सऊदी अरब की सेना को सलाह देने पर केंद्रित होगा। टाइफून फाइटर जेट हमलों को रोकने में मदद करेंगे, लेकिन ब्रिटेन के सैनिक हूतियों पर सीधे हमला नहीं करेंगे। इसके अतिरिक्त, सऊदी अरब के भीतर डिफेंस सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए आरएएफ A400M ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का उपयोग किया जाएगा। ब्रिटेन एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग सपोर्ट भी प्रदान करेगा, जिससे सऊदी जहाज हवा में ईंधन भरकर हूती ठिकानों को लंबे समय तक निशाना बना सकेंगे.


ब्रिटेन के हित और ऊर्जा सुरक्षा

ब्रिटेन सऊदी अरब को इतनी सैन्य सहायता क्यों दे रहा है, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। यूक्रेन युद्ध से पहले, यूरोप का अधिकांश ऊर्जा स्रोत रूस से आता था, लेकिन युद्ध के बाद यूरोप ने रूस से खरीद बंद कर दी। अब यूरोपीय देशों की निर्भरता खाड़ी देशों पर बढ़ गई है, और ब्रिटेन की ऊर्जा सुरक्षा भी सऊदी अरब जैसे देशों पर निर्भर है.


हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब के तेल ढांचे को निशाना बना रहे हैं, जिससे ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों पर असर पड़ रहा है। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, और ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने एक प्रेस नोट में कहा है कि खाड़ी में बढ़ती हिंसा का यूके में गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।


जंग में उलझने का खतरा

हालांकि सऊदी अरब को ब्रिटेन का सहयोग डिफेंसिव है, लेकिन जंग में उलझने का खतरा भी है। एक बार जब कोई देश युद्ध में शामिल होता है, तो वापसी का रास्ता आसान नहीं होता। यही कारण है कि अमेरिका ने सऊदी अरब को कोई विशेष मदद नहीं दी, क्योंकि उसे ईरान के अलावा एक नई जंग में उलझने का डर था.


ब्रिटेन ने 2014 से सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के खिलाफ समर्थन दिया है। यदि हूती विद्रोहियों को अधिक नुकसान होता है, तो ईरान सऊदी अरब के सहयोगी देशों के सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है।


ब्रिटेन और रूस के बीच तनाव

यूक्रेन के मुद्दे पर ब्रिटेन और रूस के बीच तनाव बढ़ चुका है। ऐसे में हूती विद्रोहियों के खिलाफ उलझना लंदन के लिए फायदेमंद नहीं होगा। हाल ही में, ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने जनता से आपातकाल के लिए आवश्यक सामान जमा करने की अपील की है। ईरान ने भी ब्रिटेन को हमले की धमकी दी है, जिससे ब्रिटेन के लिए हूती विद्रोहियों के खिलाफ सहयोग देना जोखिम भरा हो सकता है.