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ब्रिटेन ने सऊदी अरब को दी सैन्य सहायता: हूती विद्रोहियों के खिलाफ नई रणनीति

ब्रिटेन ने सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य सहायता देने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने बताया कि यह सहायता सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन भरने में मदद करेगी। यह कदम क्षेत्र में सुरक्षा को बनाए रखने के लिए उठाया गया है, खासकर जब सऊदी अरब पर लगातार हमले हो रहे हैं। जानें इस सहायता के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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सऊदी अरब को मिली ब्रिटेन की मदद


नई दिल्ली: यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ संघर्ष कर रहे सऊदी अरब को अमेरिका से जो सहायता नहीं मिली, वह अब ब्रिटेन द्वारा प्रदान की जा रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने के लिए सहमति व्यक्त की है। यह सहायता ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों का सामना करने के लिए दी जाएगी।


ब्रिटेन की सैन्य सहायता का विवरण

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए जाते समय बर्नहम ने पत्रकारों से कहा कि ब्रिटेन के विमान सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन भरने की सुविधा प्रदान करेंगे, जिसे उन्होंने पूरी तरह से 'रक्षात्मक' कदम बताया। पीए न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह सहायता केवल उन सऊदी विमानों के लिए होगी, जो देश को ड्रोन और मिसाइल हमलों से बचाने में लगे हैं। उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन हूती विद्रोहियों पर हमले के लिए सऊदी विमानों की सहायता नहीं करेगा।


सहायता की समयसीमा

जानकारी के अनुसार, वॉयजर टैंकर के माध्यम से सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों में हवा में ईंधन भरने का कार्य जल्द ही शुरू होने की संभावना है। यह मिशन सीमित समय के लिए संचालित होगा। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यह सहायता कुछ हफ्तों तक जारी रह सकती है। यह मिशन सऊदी अरब में पहले से मौजूद ब्रिटेन के स्काई सेबर एयर डिफेंस सिस्टम से अलग होगा।


ब्रिटेन की मदद का कारण

पीएम बर्नहम ने पत्रकारों को बताया कि वे ब्रिटेन और पूरे क्षेत्र के हितों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब पर लगातार हमले हो रहे हैं और भविष्य में यह खतरा और बढ़ सकता है, इसलिए इन रास्तों को खुला रखना आवश्यक है। यही कारण है कि ब्रिटेन ने सऊदी अरब के अनुरोध को स्वीकार करने का निर्णय लिया।


हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला

यह ध्यान देने योग्य है कि शनिवार को रियाद पर हुआ हूती हमला कई वर्षों में पहली बार हुआ है, जिसमें सीधे तौर पर सऊदी अरब की राजधानी को निशाना बनाया गया। इसे क्षेत्र में तनाव बढ़ने की एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है। इसी महीने, हूती विद्रोहियों ने यमन के बड़े आबादी वाले क्षेत्रों पर कब्जा करने के बाद पूरे लाल सागर तट पर तेजी से कब्जा जमाने की कोशिश की, जिससे उन्हें महत्वपूर्ण बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर भी नियंत्रण मिल गया।


सऊदी अरब 2015 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार का समर्थन करने वाले गठबंधन का नेतृत्व कर रहा है। सऊदी अरब के इस युद्ध में शामिल होने के बाद से लड़ाई और तेज हो गई थी, जिसके कारण गरीब यमन में दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक उत्पन्न हो गया है।