भारत और अमेरिका की सेना का संयुक्त युद्ध अभ्यास 2026: प्रशिक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
संयुक्त युद्ध अभ्यास 2026 का परिचय
भारतीय और अमेरिकी सेनाओं की टुकड़ियाँ 'एक्सरसाइज़ युद्ध अभ्यास 2026' के तहत विभिन्न प्लेटफार्मों और ऑपरेशनल परिस्थितियों में व्यापक संयुक्त प्रशिक्षण कर रही हैं। यह अभ्यास 15 सितंबर को आरंभ हुआ और इसका उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच कॉम्बैट टैक्टिक्स को सुधारना, संयुक्त ऑपरेशनल तैयारी को बढ़ावा देना और टैक्टिकल प्रक्रियाओं में सुधार करना है। हर साल आयोजित होने वाले इस अभ्यास में, दोनों देशों के सैनिक विभिन्न प्लेटफार्मों पर मिलकर प्रशिक्षण लेते हैं, जिससे टैक्टिक्स, तकनीक और प्रक्रियाओं (TTPs) में सुधार होता है और ऑपरेशनल बेस्ट प्रैक्टिस का आदान-प्रदान होता है।
एक्सरसाइज़ के उद्देश्य और लाभ
भारतीय सेना के एडिशनल डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ पब्लिक इन्फॉर्मेशन (ADG PI) ने बताया कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना है। इसमें दोनों सेनाओं के बीच टैक्टिक्स, तकनीक और प्रक्रियाओं की बेहतर समझ विकसित करने पर जोर दिया गया है। यह संयुक्त प्रशिक्षण ऑपरेशनल बेस्ट प्रैक्टिस के आदान-प्रदान में सहायक है और दोनों सेनाओं के बीच तालमेल को मजबूत करता है, जिससे वे विभिन्न ऑपरेशनल माहौल में एक साथ काम करने में सक्षम होते हैं।
संस्कृति और भाईचारे का आदान-प्रदान
इन संयुक्त अभ्यासों का एक और महत्वपूर्ण पहलू डिफेंस सहयोग को मजबूत करना और कमांड-एंड-कंट्रोल तालमेल को बेहतर बनाना है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि दोनों सेनाएँ कठिन परिस्थितियों में भी आसानी से संयुक्त ऑपरेशन कर सकें। हाल ही में, भारतीय और अमेरिकी सेना के जवानों ने बीकानेर के ऐतिहासिक जूनागढ़ किले और उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर का दौरा किया, जिससे उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी मिली।
प्रशिक्षण गतिविधियाँ
सोमवार को, दोनों सेनाओं के जवानों ने उत्तराखंड के औली में 'एक्सरसाइज युद्ध अभ्यास 2026' के तहत जंगल वॉरफेयर, इनडोर फायरिंग और रॉक-फेस रैपलिंग की संयुक्त ट्रेनिंग की। इस प्रशिक्षण ने दोनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल और कार्य करने के तरीकों की समझ को और मजबूत किया।
