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भारत और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा: नेकलेस ऑफ डायमंड योजना

चीन भारत के लिए एक बढ़ता खतरा बनता जा रहा है, जिसके खिलाफ भारत ने 'नेकलेस ऑफ डायमंड' नामक एक रणनीति विकसित की है। इस योजना के तहत, भारत ने दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ महत्वपूर्ण सैन्य समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं और म्यांमार के साथ नौसैनिक साझेदारी की है। इसके अलावा, भारत चाबहार पोर्ट के विकास पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। जानें इस रणनीति के विभिन्न पहलुओं के बारे में।
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चीन का बढ़ता खतरा

चीन हर दिन भारत के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। हाल के वर्षों में, चीन ने नेपाल, पाकिस्तान, म्यांमार और श्रीलंका के साथ अपने संबंधों को मजबूत करके भारत को घेरने की रणनीति अपनाई है। विशेषज्ञों ने इसे 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' का नाम दिया है। हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि भारत इस स्थिति पर चुप नहीं बैठा है।


भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए 'नेकलेस ऑफ डायमंड' नामक एक रणनीति विकसित की है। इसके तहत, भारत ने दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को लागू किया है। इस नीति के अंतर्गत, भारत ने वियतनाम, दक्षिण कोरिया, जापान, फिलीपींस, इंडोनेशिया, थाईलैंड और सिंगापुर के साथ महत्वपूर्ण सैन्य समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।


म्यांमार के साथ साझेदारी

भारत ने म्यांमार के साथ एक नौसैनिक साझेदारी की शुरुआत की है, जिसमें भारतीय नौसेना म्यांमार की नौसेना को प्रशिक्षण देगी। इसके अलावा, भारत म्यांमार के सिटवे पोर्ट पर एक व्यापारिक बंदरगाह का निर्माण कर रहा है।


चाबहार और ग्वादर

जबकि पाकिस्तान ग्वादर पोर्ट का विकास कर रहा है, भारत ईरान के चाबहार पोर्ट पर भी काम कर रहा है। चाबहार बंदरगाह भारत के पश्चिमी तट से आसानी से पहुंचा जा सकता है।


समुद्री सुरक्षा रणनीति

भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा के लिए मोजाम्बिक चैनल और पूर्वी अफ्रीकी तट को महत्वपूर्ण माना है। विश्लेषकों का मानना है कि यह अभ्यास हिंद महासागर में रक्षा संबंधों को मजबूत करने का प्रयास है।


गुप्त सैन्य गतिविधियाँ

भारत ने हाल के दिनों में कई गुप्त कदम उठाए हैं, जिसमें प्रधानमंत्री की विदेश यात्राएँ शामिल हैं। मॉरीशस में एक गुप्त सैन्य बेस का निर्माण भी चल रहा है।


सैन्य समझौते

भारत के पास जापान, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य समझौते हैं, जो भारतीय नौसेना को इन देशों के बंदरगाहों पर गतिविधियों की अनुमति देते हैं।