भारत और पाकिस्तान का विभाजन: इतिहास की एक अनकही कहानी
भारत-पाकिस्तान विभाजन का ऐतिहासिक संदर्भ
कुछ तिथियाँ ऐसी होती हैं जिन्हें इतिहास में हमेशा याद रखा जाता है। भारत के विभाजन से पहले एक अस्थायी सरकार का गठन हुआ था, जिसके प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे। इस सरकार के वित्त मंत्री लियाकत अली खान थे, और यह सरकार कांग्रेस और मुस्लिम लीग के लिए अंतिम अवसर था बंटवारे को रोकने का। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे। लियाकत पर आरोप था कि वे वित्त मंत्री के रूप में किसी भी मंत्रालय को धन जारी नहीं करते थे। 16 अगस्त 1946 की तारीख ने भारत की स्वतंत्रता के इतिहास में बंटवारे की वास्तविकता को स्थापित कर दिया। मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में एक धड़े ने भारत को विभाजित करने का प्रस्ताव रखा, जिसमें एक अलग राष्ट्र की मांग की गई जो केवल मुसलमानों के लिए हो, जिसका नाम पाकिस्तान रखा गया। परिणामस्वरूप, 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान का गठन हुआ और लियाकत अली खान इसके पहले प्रधानमंत्री बने। दोनों देश अलग-अलग हुए और लगभग समानांतर आगे बढ़े। लेकिन आज भारत की स्थिति और पाकिस्तान की स्थिति सभी के लिए स्पष्ट है। दोनों देशों को स्वतंत्रता एक साथ मिली, लेकिन एक देश ने विकास की ऊँचाइयों को छुआ, जबकि दूसरा बर्बादी और आतंकवाद का केंद्र बन गया। 79 साल पहले बंटवारे के साथ ही भारत के भूभाग पर एक ऐसी रेखा खींची गई जिसने न केवल भूमि और संसाधनों को बांटा, बल्कि विचारों को भी विभाजित कर दिया।
पाकिस्तान में लालच तंत्र की शुरुआत
हजारों वर्षों की सांस्कृतिक विरासत और सैकड़ों वर्षों की गुलामी से मुक्ति के बाद, भारत की जिम्मेदारी बहुत बड़ी थी। जबकि पाकिस्तान ने मजहब के नाम पर एक टुकड़ा लेकर अलग होने का निर्णय लिया। भारत की कुल संपत्ति का 17.5 प्रतिशत पाकिस्तान को दिया गया। पाकिस्तान को अपना अधूरा संविधान बनाने में 26 साल लगे। जिन्ना की मृत्यु पाकिस्तान के निर्माण के 13 महीने बाद हुई, और कई रिपोर्टों में कहा गया है कि उनके अंतिम शब्द थे कि पाकिस्तान का निर्माण उनकी सबसे बड़ी गलती थी। जिन्ना की मृत्यु के बाद, पाकिस्तान में सत्ता का लालच बढ़ने लगा। पाकिस्तान का पहला चुनाव मार्च 1951 में पंजाब प्रांत में हुआ, जिसमें जनता ने सीधे भाग नहीं लिया। बाद में, पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की हत्या कर दी गई। 1958 तक, पाकिस्तान में आठ प्रधानमंत्री अधूरे कार्यकाल के साथ अलविदा हो चुके थे।
सेक्युलरिज्म को संविधान में स्थान
भारत इस नए देश के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। युद्ध समाप्त होने के बाद, शेख मुजीब की आवामी लीग ने सरकार बनाई। शेख मुजीब बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति और बाद में प्रधानमंत्री बने। 1971 में जब देश बना, तो उसने खुद को एक सेक्युलर देश के रूप में घोषित किया। यह दक्षिण एशिया का पहला मुस्लिम बहुसंख्यक देश था जिसने अपने संविधान में सेक्युलरिज्म को शामिल किया। शेख मुजीब का मानना था कि मुसलमान अपने धर्म का पालन करें, जबकि हिंदू, बौद्ध और ईसाई अपने धर्म का पालन करें। वे केवल धर्म के राजनीतिक उपयोग का विरोध करते थे। शेख मुजीब को प्यार से 'बंग बंधु' कहा जाता था, और उन्हें बांग्लादेश का राष्ट्रपिता माना जाता है।
पाकिस्तान में सैन्य तख्तापलट की शुरुआत
1958 में पाकिस्तान में पहला तख्तापलट हुआ। उस समय पाकिस्तानी सेना ने सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन को बढ़ावा दिया। पाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति मेजर जनरल इस्कंदर मिर्ज़ा ने संसद और प्रधानमंत्री फिरोज खान नून की सरकार को भंग कर दिया और देश में मार्शल लॉ लागू किया। इसके बाद, आर्मी कमांडर इन चीफ जनरल अयूब खान को सत्ता सौंपी गई। तेरह दिन बाद, अयूब खान ने तख्तापलट करते हुए राष्ट्रपति को पद से हटा दिया और खुद नए राष्ट्रपति बन गए।
