भारत का मीडिल ईस्ट संघर्ष पर महत्वपूर्ण बयान
भारत ने मीडिल ईस्ट में चल रहे संघर्षों पर एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है, जिसमें सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कोलंबिया को सौंपने के साथ-साथ क्षेत्र में हो रहे मानवीय नुकसान और नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की गई है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव को बढ़ाने से बचने का आग्रह किया है। इस बयान में व्यापारिक जहाजों पर हमलों की निंदा भी की गई है, जो भारतीय नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं।
| Jun 11, 2026, 19:51 IST
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का बयान
भारत ने मीडिल ईस्ट में चल रहे संघर्षों पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभालने के लिए कोलंबिया को बधाई देते हुए, भारत ने इस महीने की खुली चर्चा को आयोजित करने के लिए धन्यवाद दिया। मीडिल ईस्ट में चल रहे संघर्षों के कारण भारी मानवीय नुकसान हुआ है, जिसमें लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में नागरिकों का विस्थापन हुआ है। इसके अलावा, नौवहन की स्वतंत्रता में बाधाएँ आई हैं, जिससे वैश्विक व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। यह स्थिति स्थापित आपूर्ति श्रृंखलाओं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को भी प्रभावित कर रही है।
भारत का रुख और चिंता
भारत ने मीडिल ईस्ट में हाल के घटनाक्रमों पर अपने रुख को स्पष्ट किया है। ईरान और खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। संघर्ष के बढ़ने और अन्य देशों में फैलने की चिंता बढ़ गई है। इस क्षेत्र में लगभग 10 मिलियन भारतीय नागरिक रहते हैं, और उनकी सुरक्षा हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारी व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाएं इस क्षेत्र की स्थिरता पर निर्भर करती हैं।
व्यापारिक जहाजों पर हमलों का विरोध
भारत ने व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों की कड़ी निंदा की है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर इन जहाजों को चलाने वाले कार्यबल में भारतीय नागरिकों की महत्वपूर्ण भागीदारी है। इस क्षेत्र में हुए हमलों के कारण कई भारतीय नागरिकों की जान गई है या वे लापता हैं।
