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भारत की कूटनीति: यूक्रेन संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा पर जोर

भारत ने यूक्रेन में चार भारतीय नाविकों की मौत पर गंभीर प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्री जयशंकर ने मनीला में रूस के लावरोव के साथ बैठक में नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया। यह घटना भारत की नई कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बदलाव का संकेत है। जानें इस महत्वपूर्ण मुलाकात के पीछे की कहानी और भारत की बढ़ती ताकत के बारे में।
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भारत की प्रतिक्रिया: यूक्रेन में भारतीय नाविकों की मौत

जब चार भारतीयों की जान गई, तो भारत की चुप्पी भी टूट गई। यूक्रेन में चल रहे युद्ध के दौरान एक मिसाइल हमले में निर्दोष भारतीय नाविकों की मौत ने दिल्ली से मनीला तक हलचल मचा दी। पूरी दुनिया इस बात की गवाह बनी कि क्या विदेश मंत्री जयशंकर रूस के साथ केवल व्यापारिक संबंधों पर चर्चा करेंगे। लेकिन जयशंकर ने लावरोव से हाथ मिलाने के साथ ही रूस को भारत की चिंताओं से भी अवगत कराया।


19 जुलाई की शाम को, यूक्रेन के ओडसा बंदरगाह पर एक मालवाहक जहाज अपनी यात्रा पर था, जब अचानक एक मिसाइल ने उसे निशाना बनाया। जहाज पर 17 चालक दल के सदस्य थे, जिनमें से पांच भारतीय थे, और इस हमले में चार भारतीयों की जान चली गई। कल्पना कीजिए उन परिवारों की, जिनके बेटे केवल रोजी-रोटी कमाने के लिए विदेश गए थे और युद्ध का शिकार हो गए। भारत ने इसे केवल एक दुर्घटना नहीं माना, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन मानते हुए गंभीरता से लिया। हमले के तुरंत बाद दिल्ली में हलचल शुरू हो गई।


मनीला में कूटनीतिक गतिविधियाँ

विदेश मंत्रालय ने सबसे पहले दिल्ली में रूसी राजनयिक को तलब किया और एक कड़ा संदेश दिया। लेकिन असली कूटनीतिक गतिविधि मनीला में हुई, जहां क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान और आसियान देशों) की बैठक चल रही थी। इस बैठक में चीन की विस्तारवादी नीतियों पर चर्चा हो रही थी, जबकि रूस भी वहां मौजूद था। इसी माहौल में जयशंकर ने अपनी कूटनीति का परिचय दिया।


उन्होंने लावरोव के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें उन्होंने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया। जयशंकर ने यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर रूस को स्पष्ट संदेश दिया। यह बैठक उस मंच पर हुई जहां अमेरिका और जापान जैसे देश भी उपस्थित थे, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत की मित्रता को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।


भारत की बढ़ती ताकत

मनीला में हुई यह मुलाकात केवल एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह इंडोपेसिफिक क्षेत्र में बदलते शक्ति संतुलन का संकेत है। चीन के प्रभाव क्षेत्र में भारत, अमेरिका और रूस का एक साथ होना यह दर्शाता है कि भारत अब किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं कर रहा है। यूक्रेन ने इस हमले के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया, जबकि भारत ने सीधे किसी का नाम नहीं लिया। लेकिन जयशंकर का लावरोव के प्रति सख्त रुख यह दर्शाता है कि भारत को पता है कि असली जिम्मेदारी किसकी है।


विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने जिस सख्त लहजे में इस हमले की निंदा की, वह भारत की नई विदेश नीति का हिस्सा है। यह स्पष्ट है कि भारत अब वह देश नहीं है जो अपने नागरिकों की मौत पर केवल शोक व्यक्त करे। जयशंकर ने मनीला में जो किया, वह भारत की बढ़ती ताकत का प्रतीक है। उन्होंने रूस को स्पष्ट कर दिया कि संबंधों की गहराई तभी बनी रहेगी जब हमारे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।