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भारत की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग और वीटो पावर का मुद्दा

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। भारत का कहना है कि नए सदस्यों को वीटो पावर नहीं मिलने पर वे दूसरे श्रेणी के देशों की तरह रह जाएंगे। भारत ने सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है, जिसमें स्थायी और अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई है। जानें भारत की रणनीति और UNSC में सुधार के लिए उठाए गए कदम।
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भारत की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की कोशिशें

भारत ने संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता प्राप्त करने के लिए लंबे समय से प्रयास किए हैं। वर्तमान में, भारत 2028-29 में अस्थायी सीट हासिल करने की योजना बना रहा है। इसी संदर्भ में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर वीटो पावर के महत्व को उठाया है। भारत का तर्क है कि यदि नए सदस्यों को वीटो पावर नहीं दी जाती है, तो वे दूसरे श्रेणी के देशों की तरह रह जाएंगे। भारत का कहना है कि भले ही नए देश UNSC के सदस्य बन जाएं, निर्णय लेने का अधिकार केवल उन पांच देशों के पास रहेगा, जिनके पास वर्तमान में यह अधिकार है। सोमवार को, भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखकर ध्यान आकर्षित किया।


वीटो पावर पर भारत का दृष्टिकोण

पी हरीश ने कहा कि जब तक वीटो का प्रावधान मौजूद है, तब तक सभी स्थायी सदस्यों को यह अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने निष्पक्षता और न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया, यह कहते हुए कि सभी स्थायी सदस्यों के अधिकार और जिम्मेदारियां समान होनी चाहिए। वर्तमान में, केवल चीन, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, रूस और फ्रांस UNSC के स्थायी सदस्य हैं और इन सभी के पास वीटो का अधिकार है। वीटो का अर्थ है कि यदि इनमें से कोई एक देश किसी निर्णय पर असहमत होता है और वीटो का उपयोग करता है, तो वह निर्णय लागू नहीं हो सकता।


भारत की मांगें और सुरक्षा परिषद में सुधार

पी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 'वीटो के सवाल पर विषयवार चर्चा' के तहत आयोजित अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) के पूर्ण सत्र में कहा कि यदि स्थायी सदस्यों की एक नई श्रेणी बनाई जाती है, जिसमें वीटो का अधिकार नहीं होगा, तो ये देश वास्तव में दूसरे श्रेणी के सदस्य बन जाएंगे। इससे P5 के निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि वीटो एक जिम्मेदारी है, जिसका उपयोग बहुत सावधानी से किया जाना चाहिए। अब तक लगभग 200 प्रस्तावों पर 331 बार वीटो का उपयोग किया गया है, जिसमें से अधिकांश का उपयोग केवल तीन देशों ने किया है।


भारत की स्थायी सदस्यता की आकांक्षा

भारत ने स्थायी और अस्थायी दोनों प्रकार के सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। भारत ने चेतावनी दी है कि यदि सुधार केवल अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने तक सीमित रहेंगे, तो ये प्रयास विफल हो जाएंगे। भारत का मानना है कि 1945 में स्थापित यह संस्था 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है और वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को नहीं दर्शाती है। भारत ने सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का उचित हकदार होने पर जोर दिया है और 2028-29 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सीट पाने की कोशिश कर रहा है।


सुरक्षा परिषद की संरचना

सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य हैं: चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका, जिनके पास वीटो का अधिकार है। इसके अलावा, परिषद में 10 अस्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।