Newzfatafatlogo

भारत के 22 नागरिकों की जान गई, पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति पर चिंता

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष में भारत के 22 नागरिकों की जान चली गई है, जिनमें 14 नाविक शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है और भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रहा है। जानें इस संघर्ष के कारण और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में।
 | 

भारत के नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता

विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को जानकारी दी कि पिछले आठ महीनों में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष में भारत के 22 नागरिकों की मृत्यु हो चुकी है, जिनमें 14 नाविक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सरकार इस क्षेत्र में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि उनकी सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित की जा सके। प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जायसवाल ने कहा कि हम इस संघर्ष को लेकर गहरी चिंता में हैं।


संघर्ष के दौरान भारतीय नाविकों की मौत

28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बमबारी की, जिसके परिणामस्वरूप तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस संघर्ष के चलते कई भारतीय नाविकों की जान गई है, और कई अन्य घायल या लापता हैं। प्रभावित नाविकों में से कई विदेशी झंडे वाले जहाजों पर कार्यरत थे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि ओमान के तट पर हुए एक हमले में पनामा के झंडे वाले जहाज 'एमटी एल गैया' पर सवार 14 भारतीय नागरिकों में से 13 को बचा लिया गया, जबकि एक नाविक लापता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग की है।


नाविकों की सुरक्षा के लिए भारत के प्रयास

सरकार स्थिति पर नजर रखने और प्रभावित चालक दल के सदस्यों की सहायता के लिए शिपिंग कंपनियों और राजनयिक मिशनों के साथ मिलकर काम कर रही है। 28 फरवरी को डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने एक सुरक्षा एडवाइजरी जारी की, जिसमें भारतीय झंडे वाले जहाजों और नाविकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई। इसके अलावा, सरकार ने चौबीसों घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं, ताकि नाविकों और उनके परिवारों को सहायता प्रदान की जा सके।