भारत के विदेश मंत्री ने यूएन में वैश्विक चुनौतियों पर उठाई आवाज
भारत का कड़ा संदेश संयुक्त राष्ट्र महासभा में
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में चल रहे 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान दुनिया की प्रमुख शक्तियों को एक बार फिर से स्पष्ट संदेश दिया है। पार्टनर्स फॉर मल्टीलटरलिज्म समिट में, जिसमें कई देशों के शीर्ष राजनयिक और वैश्विक नेता शामिल हुए, भारत ने इस उच्च स्तरीय सम्मेलन का सह-आयोजन किया। जयशंकर ने अपने भाषण में बताया कि वर्तमान समय में खोखली बयानबाजी की जगह ठोस निर्णयों की आवश्यकता है। उन्होंने वैश्विक व्यवस्था के संकट को रेखांकित करते हुए कहा कि पिछले कुछ दशकों से दुनिया एक स्वाभाविक संतुलन की ओर बढ़ रही थी, लेकिन बड़े देशों के बीच की प्रतिस्पर्धा और भू-राजनीतिक तनाव ने स्थिति को गंभीर बना दिया है।
चार एफ संकट पर ध्यान केंद्रित
जयशंकर ने विश्व नेताओं के समक्ष चार प्रमुख संकटों का उल्लेख किया, जो आम जनता के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। इनमें ईंधन की बढ़ती कीमतें, खाद्य सुरक्षा, उर्वरक की कमी और विकासशील देशों पर बढ़ते कर्ज शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये समस्याएं अपने आप हल नहीं होंगी और इसके लिए वैश्विक शक्तियों को जिम्मेदारी लेनी होगी। इसके अलावा, उन्होंने सप्लाई चेन में रुकावट और व्यापारिक ब्लैकमेलिंग के खतरों पर भी चिंता व्यक्त की।
संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की कार्यशैली में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए सुधारवादी बहुपक्षवाद की मांग की। उन्होंने कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और भागीदारी की आवश्यकता है, ताकि वैश्विक संस्थाएं आज की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि बंद कमरों में लिए गए निर्णय अब स्वीकार्य नहीं हैं। डॉ. एस. जयशंकर का यह संदेश दर्शाता है कि भारत अब केवल एक श्रोता नहीं, बल्कि वैश्विक दिशा तय करने वाला एक मजबूत नेतृत्वकर्ता बन चुका है।
