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भारत को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से मिलती रही ऊर्जा सप्लाई, हूती हमलों के बावजूद

यमन में हूती विद्रोहियों के हमलों के बावजूद, भारत को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति मिलती रही है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा शिपमेंट के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते। विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब पर हुए हमलों की निंदा की है और क्षेत्र में स्थिरता की उम्मीद जताई है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
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भारत की ऊर्जा सप्लाई पर हूती विद्रोहियों का प्रभाव

यमन में हूती विद्रोहियों के हालिया हमलों के बावजूद, भारत को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति मिलती रही है। इस क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के बीच, यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा शिपमेंट के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण बन गया है। यह रणनीतिक मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और पश्चिमी एशिया से वैश्विक बाजार तक ऊर्जा की आपूर्ति के लिए एक आवश्यक रूट है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण, भारत के लिए इसका महत्व और बढ़ गया है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग में रुकावट आई है।


विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने सऊदी अरब के संप्रभु क्षेत्र पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है, जिसमें आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे और आर्थिक संपत्तियों को निशाना बनाया गया है।


उन्होंने यह भी बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ हूती हमलों और क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा की। जायसवाल ने कहा कि हमारे विदेश मंत्री ने इस बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।


जयसवाल ने कहा, "हाल ही में सऊदी अरब पर हुए हमले की हमने निंदा की है। हम रेड सी क्षेत्र में बिगड़ते हालात को लेकर चिंतित हैं।"


उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे हमले क्षेत्र की स्थिरता और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता को खतरे में डालते हैं। ये गतिविधियाँ भारत के लिए स्वीकार्य नहीं हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आशा व्यक्त की कि क्षेत्र में जल्द ही शांति और स्थिरता स्थापित होगी।