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भारत को रूस से मिल रहा वोरोनिश-एम रडार: क्या है इसकी खासियत?

रूस ने भारत को वोरोनिश-एम रडार का प्रस्ताव दिया है, जो सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। यह रडार बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों की निगरानी में सक्षम है और इसकी क्षमता 6,000 से 8,000 किलोमीटर तक है। जानें इस रडार की विशेषताएँ, भारत के लिए इसका महत्व और कैसे यह पाकिस्तान और चीन के खिलाफ सुरक्षा में मदद कर सकता है।
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नई दिल्ली में रूस का प्रस्ताव


नई दिल्ली: रूस ने भारत को केवल Su-57 स्टील्थ फाइटर और Su-30MKI के अपग्रेड का प्रस्ताव नहीं दिया है, बल्कि Pantsir-SM1 शॉर्ट-रेंज मिसाइल सिस्टम, अकुला-क्लास परमाणु पनडुब्बी और वोरोनिश-एम रणनीतिक रडार के लिए भी प्रस्ताव रखे हैं। सूत्रों के अनुसार, ये प्रस्ताव भारत को पहले ही सौंपे जा चुके हैं।


वोरोनिश-एम रडार की विशेषताएँ

वोरोनिश-एम एक अत्याधुनिक लंबी दूरी का रणनीतिक रडार है, जिसकी निगरानी क्षमता लगभग 6,000 से 8,000 किलोमीटर तक है। यह एक साथ कई लक्ष्यों पर नजर रख सकता है और इसका उपयोग बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ लड़ाकू विमानों की गतिविधियों पर निगरानी के लिए किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत और रूस इस रडार की स्थापना को लेकर दिसंबर 2024 में बातचीत कर रहे हैं। यह सिस्टम बैलिस्टिक मिसाइल हमलों की प्रारंभिक चेतावनी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


वोरोनिश रडार की ताकत

भारतीय वायुसेना के पूर्व पायलट और एविएशन विशेषज्ञ विजयेन्द्र के ठाकुर के अनुसार, वोरोनिश रडार बैलिस्टिक मिसाइलों और स्टील्थ विमानों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने में सक्षम है। यह अंतरिक्ष से जुड़े खतरों की निगरानी में भी सहायक हो सकता है।


इस रडार में फेज्ड-एरे तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक बीम को तेजी से विभिन्न दिशाओं में भेजा जा सकता है। यह तकनीक पुराने Dnepr और Daryal रडार की तुलना में अधिक उन्नत मानी जाती है। वोरोनिश सिस्टम का आकार छोटा है, ऊर्जा की आवश्यकता कम है और इसे तेजी से स्थापित किया जा सकता है।


भारत के लिए वोरोनिश रडार का महत्व

वोरोनिश सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विशाल क्षेत्र निगरानी क्षमता है। रूस में स्थापित इसके विभिन्न सिस्टम यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका के क्षेत्रों की निगरानी में मदद करते हैं। यदि भारत में ऐसा रडार स्थापित किया जाता है, तो इसकी निगरानी क्षमता पाकिस्तान और चीन के बड़े हिस्से तक पहुंच सकती है, जिससे भारत की प्रारंभिक चेतावनी और हवाई निगरानी क्षमता में सुधार होगा।


वोरोनिश रडार के प्रकार

वोरोनिश परिवार में कई प्रकार के रडार शामिल हैं, जैसे वोरोनिश-एम, वोरोनिश-डीएम और वोरोनिश-एसएम। ये विभिन्न आवृत्तियों और आवश्यकताओं के अनुसार कार्य करते हैं। वोरोनिश-एम VHF बैंड पर काम करता है, जबकि वोरोनिश-डीएम UHF बैंड का उपयोग करता है। वोरोनिश-एसएम L-बैंड पर कार्य करता है और सटीक ट्रैकिंग के साथ अनावश्यक संकेतों को हटाने की क्षमता रखता है।


वोरोनिश रडार का सामूहिक कार्य

विजयेन्द्र के ठाकुर के अनुसार, विभिन्न वोरोनिश रडार एक बड़े प्रारंभिक चेतावनी नेटवर्क का हिस्सा बनकर कार्य कर सकते हैं। प्रत्येक रडार अपने क्षेत्र में लक्ष्यों पर नजर रखता है और उनकी जानकारी केंद्रीय प्रणाली को भेजता है। इसके बाद, केंद्रीय सिस्टम इन आंकड़ों को सैटेलाइट और अन्य सेंसर से प्राप्त जानकारी के साथ जोड़ता है, जिससे निगरानी क्षेत्र की एक संयुक्त तस्वीर तैयार होती है।