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भारत ने UNSC की अस्थायी सदस्यता के लिए चुनावी अभियान की शुरुआत की

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता के लिए अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में इस अभियान का उद्घाटन किया, जिसमें भारत और ताजिकिस्तान एशिया-पैसिफिक ग्रुप की एकमात्र सीट के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे। यह पहल 2027 में होने वाले UN जनरल असेंबली चुनावों से पहले भारत की राजनयिक कोशिशों को दर्शाती है। भारत UNSC में सुधार की मांग कर रहा है, जिसमें स्थायी और अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
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भारत की UNSC सदस्यता की दावेदारी

भारत ने बदलती वैश्विक भू-राजनीति और युद्धों के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में एक विशेष कार्यक्रम में भारत का आधिकारिक चुनावी अभियान 'शांति: यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल 2028-29 के लिए भारत - नियम, भरोसा, ईमानदारी' का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों के राजनयिक और उच्च अधिकारी शामिल हुए।


2028-29 कार्यकाल के लिए चुनाव

2028-29 कार्यकाल के लिए चुनाव अगले वर्ष जून में होंगे, जिसमें भारत और ताजिकिस्तान एशिया-पैसिफिक ग्रुप की एकमात्र सीट के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे। जयशंकर ने UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मिलने का भी कार्यक्रम बनाया है। उन्होंने हाल ही में कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान की यात्रा की थी और अब न्यूयॉर्क पहुंचे हैं।


भारत की पहल का महत्व

यह अभियान 2027 में होने वाले यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली चुनावों से पहले नई दिल्ली की राजनयिक कोशिशों की शुरुआत करेगा। भारत एशिया-पैसिफिक सीट जीतने के लिए प्रयासरत है। यह भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह UNSC में अस्थायी सदस्यता की नौवीं बार प्राप्ति की दिशा में एक कदम है।


भू-राजनीतिक बदलावों के बीच UNSC चुनाव

UNSC चुनाव ऐसे समय में होंगे जब दुनिया यूक्रेन युद्ध, गाज़ा संघर्ष और ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़राइल युद्ध जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है और विकासशील देशों को वैश्विक मामलों में समान भागीदारी की आवश्यकता है।


भारत की सुधार की मांग

भारत ने UNSC में सुधार की मांग की है, जिसमें स्थायी और अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। भारत का मानना है कि 1945 में स्थापित यह परिषद अब 21वीं सदी की वास्तविकताओं को नहीं दर्शाती है।


भारत की स्थायी सदस्यता की मांग

दिल्ली ने सुरक्षा परिषद की बैठक की मेज़ पर स्थायी सीट पाने का अधिकार जताया है। भारत ने UNSC की स्थायी और अस्थायी सदस्यता में विस्तार की मांग की है और चेतावनी दी है कि केवल अस्थायी सदस्यता का विस्तार सुधारों को नाकाम बना देगा।


UN में सुधार की प्रक्रिया

चूंकि UNSC में सुधार की प्रक्रिया धीमी है, भारत ने कहा है कि निर्णय लेने में देरी नहीं होनी चाहिए। UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि यथास्थिति बनाए रखने वाले तर्कों का उपयोग असमानताओं को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।


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