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भारत ने अमेरिका को दी स्पष्ट चेतावनी, टेरिफ का नहीं होगा असर

भारत ने अमेरिका के द्वारा लगाए गए टेरिफ के खिलाफ एक मजबूत प्रतिक्रिया दी है, यह स्पष्ट करते हुए कि वह अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करेगा। अमेरिका के नए कानून के तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टेरिफ लगाने का प्रावधान है, लेकिन भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को बनाए रखने का संकल्प लिया है। जानिए कैसे भारत ने अमेरिका की चालों को नकारते हुए अपनी स्थिति को मजबूत किया है।
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भारत की दृढ़ता के आगे अमेरिका की चालें बेकार

भारत ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह किसी भी दबाव में नहीं आएगा, चाहे अमेरिका कितने भी टेरिफ क्यों न लगा दे। यह चेतावनी दिल्ली के कूटनीतिक गलियारों से आई है, जिसने वाशिंगटन और डोनाल्ड ट्रंप को चौंका दिया है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता के बाद, जहां प्रधानमंत्री मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग ने एकजुटता दिखाई, अमेरिका की चिंताएं बढ़ गई हैं। ट्रंप अब यह सोच रहे हैं कि इन देशों की एकता को कैसे तोड़ा जाए। भारत की बढ़ती वैश्विक स्थिति और रूस के साथ मजबूत संबंधों ने अमेरिका को परेशान कर दिया है, जिसके चलते उसने भारत और अन्य देशों को घेरने की योजना बनाई है।


अमेरिका का नया कानून और भारत की प्रतिक्रिया

अमेरिकी सेनेट ने एक नया कानून पारित किया है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टेरिफ लगाने का प्रावधान है। चूंकि भारत रूस से सबसे अधिक तेल खरीदता है, यह स्पष्ट है कि भारत इस टेरिफ के दायरे में आएगा। लेकिन मोदी सरकार ने इस आर्थिक दबाव को नकारते हुए एक मजबूत जवाब दिया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह अपने 140 करोड़ नागरिकों के हितों से समझौता नहीं करेगा और रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदता रहेगा।


लिंडसे ग्राहम बिल और भारत की नीति

लिंडसे ग्राहम बिल, जिसे अमेरिका में लाया गया है, का उद्देश्य उन देशों पर टेरिफ लगाना है जो रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदते हैं। इस बिल को अमेरिकी सेनेट में 86-11 के बहुमत से पारित किया गया है और अब इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में पेश किया जाएगा। अमेरिका को उम्मीद थी कि 100% टेरिफ के डर से भारत अपनी नीति बदलेगा, लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के फैसले अपने नागरिकों के हित में करेगा।