भारत ने चीन को भेजा कड़ा संदेश, सीमा पर घुसपैठ को लेकर हुई अहम बैठक
भारत-चीन सीमा विवाद पर नई स्थिति
नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों की घुसपैठ की रिपोर्ट्स के बीच, भारत ने चीन को स्पष्ट संदेश दिया है। भारत ने कहा है कि सीमा पर चीनी सेना की ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने की चेतावनी दी गई है।
इस मुद्दे पर रविवार को भारत और चीन के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इस बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े कई मुद्दों पर विचार किया गया। यह वार्ता देर रात तक चली। सूत्रों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के टाकसिंग क्षेत्र में चीनी सैनिकों के प्रवेश की सूचना के बाद इस बैठक को विशेष महत्व दिया गया।
इस बातचीत में भारतीय सेना के तीसरे कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने भारतीय पक्ष का नेतृत्व किया, जबकि चीन की ओर से भी समान रैंक के अधिकारी शामिल हुए।
सैन्य बैठक का महत्व
क्यों अहम है यह सैन्य बैठक?
यह सैन्य वार्ता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की पिछले महीने बीजिंग यात्रा के बाद हुई है। डोभाल ने चीन में विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता के दौरान चीनी विदेश मंत्री के साथ LAC सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की थी। पूर्वी क्षेत्र के सैन्य कमांडरों की यह पहली बैठक मानी जा रही है।
शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले की बातचीत
जिनपिंग के भारत दौरे से पहले बढ़ी अहमियत
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस सप्ताह BRICS सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आने की संभावना है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जिनपिंग के बीच संभावित द्विपक्षीय मुलाकात से पहले हुई यह सैन्य बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत-चीन संबंधों पर जनरल अनिल चौहान की राय
‘रिश्तों को सिर्फ सीमा विवाद तक सीमित नहीं किया जा सकता’
इस बीच, पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने चीन के साथ संबंधों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत-चीन सीमा विवाद अभी पूरी तरह से हल नहीं हुआ है और LAC को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के संबंधों को केवल सीमा विवाद के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। भारत और चीन एशिया की प्रमुख शक्तियां और अर्थव्यवस्थाएं हैं, और उनके बीच सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों मौजूद हैं। इसलिए, चीन के साथ निरंतर संवाद और संपर्क बनाए रखना आवश्यक है।
