भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में नया रिकॉर्ड स्थापित किया
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस से बढ़ती खरीद
वर्तमान में वैश्विक स्तर पर तनाव अपने चरम पर है, जहां युद्ध की आशंका और ऊर्जा संकट की चिंताएं बढ़ रही हैं। ऐसे में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद को और बढ़ा दिया है। जुलाई में भारत ने रूस से रिकॉर्ड मात्रा में तेल खरीदा, जो देश के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से अधिक हिस्सा बन गया। इस महीने में भारत ने रूस से अब तक का सबसे अधिक कच्चा तेल प्राप्त किया, जिसमें लगभग 28 लाख बैरल प्रतिदिन का आंकड़ा शामिल है। इस प्रकार, रूस का भारत के कुल तेल आयात में हिस्सा पहली बार 55% से अधिक हो गया। सीधे शब्दों में कहें तो जुलाई में भारत द्वारा विदेशों से खरीदे गए कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा रूस का था.
पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद रूस का तेल व्यापार
जब 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ, तब अमेरिका और यूरोप सहित कई पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए। इसके परिणामस्वरूप, रूस ने अपने तेल को कम कीमत पर बेचना शुरू किया, और भारत ने अपनी बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को देखते हुए रूस से तेल खरीद बढ़ा दी। अब रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन चुका है। हालांकि, भारत केवल रूस पर निर्भर नहीं है। जुलाई के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत ने पश्चिम एशिया के देशों से भी तेल खरीद बढ़ाई है। सऊदी अरब से भारत का तेल आयात बढ़कर लगभग 4.2 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है।
भारत की ऊर्जा नीति और अमेरिकी प्रतिबंध
भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, अपनी अर्थव्यवस्था और जनता की आवश्यकताओं के लिए निरंतर ऊर्जा की आवश्यकता महसूस करता है। भारत की नीति स्पष्ट है कि वह बेहतर कीमत और विश्वसनीय सप्लाई वाले स्रोतों से तेल खरीदेगा। हाल ही में, अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले एक बिल को मंजूरी दी है, जिसमें उन देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल या गैस खरीदते हैं। इस बिल का सीधा असर भारत और चीन जैसे बड़े तेल खरीददार देशों पर पड़ सकता है।
भारत की स्थिति और वैश्विक राजनीति
भारत ने इस स्थिति पर कहा है कि वह घटनाक्रम पर ध्यान दे रहा है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत की ऊर्जा नीति किसी भी दबाव में नहीं, बल्कि देश के हित और 140 करोड़ लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। इस प्रकार, भारत रूस से सस्ता और विश्वसनीय तेल प्राप्त कर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर रहा है, जबकि अमेरिका जैसे देशों के साथ अपने संबंधों का संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
