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भारत-रूस संबंध: एक नई रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ते कदम

रूस ने हाल ही में भारत के साथ अपने संबंधों को 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' के रूप में वर्णित किया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस के चीन और पाकिस्तान के साथ संबंध मजबूत हो रहे हैं। भारत और रूस के बीच का रिश्ता ऐतिहासिक है, जिसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे का समर्थन किया है। जानें, कैसे ये संबंध ऊर्जा, रक्षा और व्यापार के क्षेत्रों में विकसित हो रहे हैं।
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भारत और रूस के रिश्तों में नया मोड़


नई दिल्ली: चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियों के बीच, रूस ने भारत के साथ अपने संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि भारत और रूस के बीच संबंध अब "विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी" के स्तर पर पहुंच चुके हैं। मंत्रालय ने टेलीग्राम पर एक पोस्ट में यह भी याद दिलाया कि 3 अक्टूबर 2000 को दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी का घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह हस्ताक्षर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान हुआ था, जो 2 से 5 अक्टूबर 2000 तक चली थी। तब से, दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ता जा रहा है।


भारत: रूस का विश्वसनीय साथी

बयान में यह भी उल्लेख किया गया है कि "भारत रूस का एक पुराना और विश्वसनीय साथी है। दशकों से हमारे देशों के बीच भरोसे पर आधारित मित्रता रही है।" मंत्रालय ने कहा कि दोनों देश अंतरराष्ट्रीय संबंधों में लोकतंत्रीकरण का समर्थन करते हैं और G20, UN, BRICS और SCO जैसे मंचों पर एक साथ काम कर रहे हैं।


इसके अलावा, रूस ने 5 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में हुई बातचीत के बाद पुतिन के बयान को भी दोहराया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत और रूस दोनों स्वतंत्र और स्वायत्त विदेश नीति का पालन करते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस के चीन के साथ आर्थिक और सैन्य संबंध अपने उच्चतम स्तर पर हैं। पाकिस्तान भी लगातार मॉस्को की प्रशंसा कर रहा है और उसके करीब जाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में रूस का भारत के प्रति यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


भारत-रूस संबंधों की विशेषता

भारत और रूस के बीच का रिश्ता ऐतिहासिक रहा है। कठिन समय में दोनों ने हमेशा एक-दूसरे का साथ दिया है। आज भी, रूस भारत की ऊर्जा सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। अमेरिका के भारी दबाव के बावजूद, रूस से तेल की आपूर्ति जारी है। हथियारों के क्षेत्र में भी, रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार बना हुआ है। दोनों देश 2030 तक आपसी व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा, अंतरिक्ष, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, परमाणु ऊर्जा और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर परियोजनाएं चला रहे हैं।