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भारतीय नौसेना ने समुद्री डाकुओं से बचाया मालवाहक जहाज

गल्फ ऑफ एडन में एक मालवाहक जहाज पर समुद्री डाकुओं के हमले के दौरान भारतीय नौसेना ने अपनी बहादुरी का परिचय दिया। जहाज पर सवार 21 क्रू मेंबर्स, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल था, ने मदद मांगी। भारतीय नौसेना के कैस्टल फ्रीगेट आईएएस त्रिखंड ने समय पर पहुंचकर जहाज को सुरक्षित किया। यह घटना भारतीय नौसेना की शक्ति और तत्परता को दर्शाती है। जानें इस साहसिक बचाव की पूरी कहानी।
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समुद्री डाकुओं का हमला और भारतीय नौसेना की तत्परता

गल्फ ऑफ एडन से एक महत्वपूर्ण घटना सामने आई है, जो मालवाहक जहाजों के लिए गंभीर खतरा बन सकती थी। लेकिन भारतीय नौसेना ने अपने जांबाज मार्कोस कमांडो के साथ यह साबित कर दिया कि समुद्र में उसकी शक्ति अद्वितीय है। 1 जुलाई को, जिबूती के तट से 300 मील दूर, एक जहाज पर अचानक हंगामा मच गया। लुटेरों ने उस जहाज पर चढ़ने का प्रयास किया, जिसके कारण गोलियों की आवाज सुनाई दी। जहाज के सभी क्रू मेंबर्स ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया, और उनकी उम्मीदें टूटने लगीं। लेकिन तभी उन्होंने मदद मांगी, और भारतीय नौसेना का कैस्टल फ्रीगेट आईएएस त्रिखंड वहां पहुंचा। यह समुद्र का वह भूत है, जिसे दुश्मन देख नहीं सकता, लेकिन उसकी मार से बच नहीं सकता।


जैसे ही गल्फ ऑफ अदन में मौजूद पायलट ने भारतीय नौसेना को अपनी ओर आते देखा, वह भाग खड़े हुए। जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में एमवी गोल्डन आर्सलेन नामक एक मालवाहक जहाज था, जो समुद्री डाकुओं के निशाने पर था। उन्होंने इस जहाज पर कब्जा करने का प्रयास किया। यह जहाज यमन के अदन से यात्रा कर रहा था और इसमें कुल 21 क्रू मेंबर थे, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल था। भारतीय नौसेना ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि समुद्र की लहरों का राजा उसे ही क्यों कहा जाता है?