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मध्य-पूर्व में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ता तनाव

मध्य-पूर्व में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते तनाव ने एक नए युद्ध का खतरा पैदा कर दिया है। हालिया घटनाक्रमों के अनुसार, सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई की है, जबकि हूती विद्रोही सऊदी अरब की घेराबंदी की धमकी दे रहे हैं। क्या सऊदी अरब अब अमेरिका की ओर झुक रहा है? जानें इस जटिल स्थिति के पीछे के कारण और संभावित परिणाम।
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मध्य-पूर्व में युद्ध का नया खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच, मध्य-पूर्व में एक और युद्ध का खतरा बढ़ता जा रहा है। कई वर्षों के बाद, सऊदी अरब और हूती विद्रोही आमने-सामने आ गए हैं। यमन के सना एयरपोर्ट पर हमले के बाद, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की घेराबंदी की चेतावनी दी है। यदि तनाव और बढ़ता है, तो इसका प्रभाव मध्य-पूर्व के अन्य क्षेत्रों, जैसे बाब अल-मंडेब, पर भी पड़ सकता है.


सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच युद्धविराम का टूटना

चार साल पहले, 2022 में, सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों ने युद्धविराम की घोषणा की थी। लेकिन हालिया घटनाक्रम के बाद, हूती विद्रोहियों का कहना है कि यह समझौता अब समाप्त हो चुका है। आइए देखते हैं कि सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच ताजा झड़प का कारण क्या है, और क्या सऊदी अरब अब अमेरिका की ओर झुक रहा है?


तनाव की शुरुआत कैसे हुई?

तनाव की शुरुआत 3 जुलाई को हुई, जब एक ईरानी जहाज यमन की राजधानी सना में उतरा। हूती विद्रोहियों ने आरोप लगाया कि सऊदी अरब की वायुसेना ने इस जहाज को उतरने से रोकने की कोशिश की। यह एक दशक में पहली बार था जब कोई ईरानी जहाज सना पहुंचा। इस जहाज पर हूती का प्रतिनिधिमंडल तेहरान गया, जहां उन्होंने दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सुपुर्द-ए-खाक रस्म में भाग लिया। 13 जुलाई को जब यह प्रतिनिधिमंडल वापस लौटा, तो स्थिति बिगड़ गई।


ईरानी विमान को रोकने का कारण

सऊदी अरब और यमन की सरकारें नहीं चाहतीं कि सना में ईरान के जहाज उतरें। उनका आरोप है कि इन उड़ानों के माध्यम से ईरान हूती विद्रोहियों को हथियार भेज रहा है। यमन के राजदूत अब्दुल्ला अल-सादी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इन आरोपों को दोहराया। उनका कहना है कि जो विमान सना में उतरने का प्रयास कर रहा था, वह ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर से संबंधित था।


सऊदी अरब को सजा मिलेगी

हूती विद्रोहियों ने सना एयरपोर्ट पर हमले का दोष सऊदी अरब पर लगाया। इसके जवाब में, उन्होंने दक्षिणी सऊदी अरब के आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बैलेस्टिक मिसाइलों से हमला किया। सऊदी अरब ने इन हमलों को रोकने का दावा किया। बाद में, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की घेराबंदी की घोषणा की। हूती के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-बुखैती ने कहा कि सऊदी अरब को इसकी सजा मिलेगी।


हूती विद्रोहियों की चेतावनी

हूती विद्रोहियों ने कहा है कि सना से तेहरान के बीच उड़ानें जारी रहेंगी। यदि सऊदी अरब ने बाधा डाली, तो वे उसके एयरपोर्ट को ठप्प करने में संकोच नहीं करेंगे। इसके अलावा, वे बाब अल-मंडेब को बंद करने की भी धमकी दे सकते हैं, जिससे सऊदी अरब को बड़ा नुकसान होगा।


सऊदी अरब की नई रणनीति

हूती विद्रोहियों के खिलाफ हमले के जरिए, सऊदी अरब ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में एक पक्ष लेने लगा है। यदि ईरान के कारण उसके हितों को खतरा होता है, तो सऊदी अरब न केवल हूती विद्रोहियों, बल्कि ईरान के खिलाफ भी खुलकर सामने आ सकता है।


पाकिस्तान की स्थिति

जंग की शुरुआत में, ईरान ने सऊदी अरब को निशाना बनाया। रियाद के दबाव के बावजूद, पाकिस्तान ने अपनी सेना नहीं भेजी, जबकि दोनों देशों के बीच रक्षा समझौता है। हालांकि, युद्धविराम के दौरान, पाकिस्तान ने कुछ जहाज और सैनिकों को सऊदी अरब में तैनात किया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि हूती विद्रोहियों का संघर्ष बढ़ता है, तो क्या पाकिस्तान सऊदी अरब का समर्थन करेगा?