महात्मा गांधी की शिक्षाएं: वर्तमान संघर्षों में शांति का मार्गदर्शन
महात्मा गांधी की शिक्षाओं का महत्व
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने तीन अक्टूबर को कहा कि आज के बढ़ते विभाजन और संघर्ष के समय में महात्मा गांधी की शिक्षाएं हमें नई चेतना प्रदान करती हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गांधी द्वारा प्रचारित सहानुभूति की भावना को अपनाने का आग्रह किया। गांधी जयंती, जो हर साल दो अक्टूबर को मनाई जाती है, के अवसर पर गुतारेस ने कहा, “इस अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर हम महात्मा गांधी के अद्वितीय जीवन और उनकी विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।”
गुतारेस ने बताया कि गांधी ने अपने जीवन में शांति के सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए स्थायी और गहरे बदलाव लाने का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि अन्याय का सामना करने का सबसे प्रभावी तरीका हिंसा और दमन का जवाब देना नहीं है, बल्कि संवाद और अहिंसा के माध्यम से आपसी समझ और गरिमा को सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, “बढ़ते विभाजन और संघर्ष के इस समय में गांधी की शिक्षाएं हमें नई चेतना देती हैं।”
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने आगे कहा, “लोग पीड़ित हैं, और गरीबी तथा असमानता ने समृद्ध और वंचित वर्गों के बीच की खाई को बढ़ा दिया है। शांति और विकास की नींव, जैसे कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर, मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय कानून, कूटनीति और संवाद, को नजरअंदाज किया जा रहा है।”
उन्होंने कहा, “इस तनावपूर्ण समय में आइए, गांधी के साहस, सहानुभूति, गरिमा और साझा मानवता के मूल्यों को अपनाएं। वास्तविक संवाद और कूटनीति के माध्यम से विभाजन को समाप्त करने, पीड़ा को कम करने और अहिंसा के जरिए एक शांतिपूर्ण विश्व बनाने का प्रयास करें।”
इस अवसर पर, भारत के स्थायी मिशन ने संयुक्त राष्ट्र में ‘शांति और विकास के साधन के रूप में अहिंसा’ विषय पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि गांधी की विकास दृष्टि, सर्वोदय की अवधारणा के माध्यम से, आज की दुनिया में समावेशी और सतत विकास की आवश्यकता को पूरा करती है। उन्होंने यह भी कहा कि गांधी की पर्यावरण के प्रति सजगता इस बात में प्रकट होती है कि पृथ्वी हर व्यक्ति की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन देती है, लेकिन हर व्यक्ति के लालच को नहीं।
उन्होंने यह विचार जलवायु संबंधी चिंताओं के संदर्भ में प्रासंगिक बताया और सतत जीवनशैली तथा पृथ्वी के प्रति जिम्मेदार संरक्षण का आह्वान किया।
