मास्को में ड्रोन हमले के बीच संसदीय चुनाव: क्या है यूक्रेन का हाथ?
भीषण ड्रोन हमला और चुनाव का माहौल
नई दिल्ली: रूस में तीन दिन तक चलने वाले संसदीय चुनाव के अंतिम दिन, राजधानी मास्को एक गंभीर ड्रोन हमले का शिकार बनी। इस हमले का निशाना मास्को की एक प्रमुख ऑयल रिफाइनरी थी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आसमान में धुएं का गुबार फैल गया। हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन रूसी अधिकारियों ने यूक्रेन को इस हमले का जिम्मेदार ठहराया है। यूक्रेन ने इस हमले की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है, लेकिन यह हमला सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ड्रोन हमले के दौरान मतदान
रूस के स्टेट ड्यूमा चुनाव के अंतिम दिन, मास्को की एक तेल रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला किया गया। मास्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन के अनुसार, इस हमले के बाद रिफाइनरी में भीषण आग लग गई। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में आग की लपटें और धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। इसी दौरान, कीव क्षेत्र में एक रूसी ड्रोन हमले ने एक परिवार को बर्बाद कर दिया, जिसमें एक महिला और उसके दो बच्चों की जान चली गई।
पुतिन के लिए चुनाव की चुनौती
पुतिन का शक्ति परीक्षण
यह हमला उस समय हुआ है जब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए यह चुनाव यूक्रेन युद्ध पर जनता के समर्थन की परीक्षा है। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर सैन्य अभियान शुरू होने के बाद यह रूस का पहला संसदीय चुनाव है। क्रेमलिन इस चुनाव के परिणामों के माध्यम से यह संदेश देना चाहता है कि रूसी जनता अपनी सरकार के साथ खड़ी है। हालांकि, तीन दिनों की मतदान प्रक्रिया में सत्ताधारी 'यूनाइटेड रशिया' पार्टी का दबदबा बनाए रखने की संभावना है।
चुनाव में दखल और साइबर हमले
चुनाव में दखल और साइबर हमलों की साजिश
रूस ने इस हमले को चुनाव प्रक्रिया में खलल डालने की यूक्रेन की साजिश बताया है। राष्ट्रपति पुतिन ने पहले भी यूक्रेन पर चुनावी माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया था। उन्होंने जापोरिज्जिया में चुनावी अधिकारी एलेना अस्तानिना के घर पर हुए हमले का जिक्र किया, जिसमें उनकी मौत हो गई थी। कीव प्रशासन ने इन चुनावों को दिखावटी करार दिया है। इसके अलावा, रूसी अधिकारियों ने मास्को की ऑनलाइन वोटिंग प्रणाली पर हुए साइबर हमले का भी खुलासा किया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
युद्ध की थकान और कड़ा सुरक्षा पहरा
वर्तमान स्थिति को देखते हुए रूस में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सरकार का तर्क है कि पश्चिमी देशों के साथ चल रहे टकराव के दौरान आंतरिक एकता बनाए रखना आवश्यक है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावों के परिणाम पहले से तय हैं, लेकिन लंबे समय से चल रहे युद्ध और आर्थिक दबाव के कारण जनता में थकान देखी जा रही है, जो विपक्षी दलों को मिलने वाले वोटों में असर डाल सकती है।
