मिस्र की सेना हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग में शामिल हो सकती है
मिस्र की संभावित सैन्य कार्रवाई
यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ मिस्र की सैन्य कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी ने रियाद में सेना भेजने का समर्थन किया है। अगले सप्ताह मिस्र की संसद में इस पर मतदान होगा, जो तय करेगा कि सेना हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग में शामिल होगी या नहीं। हालांकि, सांसदों को इस बड़े निर्णय के लिए गंभीर चिंताओं का सामना करना पड़ रहा है।
विपक्ष का विरोध
मिस्र की विपक्षी पार्टियों ने सेना भेजने के प्रस्ताव का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे न केवल मिस्र युद्ध में फंसेगा, बल्कि सुरक्षा और आर्थिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ेगा। सिविल डेमोक्रेटिक मूवमेंट ने मध्यस्थता पर जोर देने की बात की है। इजिप्शियन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ने अपने सांसदों को मतदान से दूर रहने का निर्देश दिया है, जबकि वफद पार्टी ने सेना भेजने का समर्थन किया है।
संसद में बहुमत की आवश्यकता
राष्ट्रपति अल-सिसी सऊदी अरब में सेना भेजना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए संसद की मंजूरी आवश्यक है। यह संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें राष्ट्रपति को पहले राष्ट्रीय रक्षा परिषद से सलाह लेनी होती है और फिर दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करना होता है। यदि बहुमत नहीं मिलता, तो राष्ट्रपति सेना को भेजने में असमर्थ रहेंगे।
संसद का राजनीतिक परिदृश्य
मिस्र की संसद में 596 सदस्य हैं, जिसमें से 398 सदस्यों की आवश्यकता है। राष्ट्रपति अल-सिसी को वफद, अदल और रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी का समर्थन प्राप्त है। वर्तमान में, निचले सदन में 568 निर्वाचित सीटें हैं, जिनमें से 53 विपक्षी दलों और 105 निर्दलियों के पास हैं। इस स्थिति में, सेना भेजने का प्रस्ताव आसानी से पारित हो सकता है।
सऊदी अरब को सैन्य सहायता
राष्ट्रपति अल-सिसी ने स्पष्ट किया है कि सऊदी अरब में मिस्र का मिशन रक्षात्मक होगा। यदि रियाद मदद मांगता है, तो ही सेना भेजी जाएगी। इसके बाद, मिस्र के विदेश मंत्री और खुफिया प्रमुख ने सऊदी अरब जाकर क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को राष्ट्रपति का पत्र सौंपा, जिसमें कहा गया कि मिस्र की सेना सऊदी अरब की सीमाओं की रक्षा में मदद करेगी।
मिस्र और सऊदी अरब के संबंध
सऊदी अरब वर्तमान में मिस्र का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक सहयोगी है। मिस्र की ऊर्जा सुरक्षा भी सऊदी अरब पर निर्भर है। इसके अलावा, रियाद मिस्र को आर्थिक संकट से उबरने में मदद करता है। इसलिए, हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब का समर्थन करना काहिरा के लिए एक रणनीतिक जिम्मेदारी है।
क्या मिस्र युद्ध में फंसेगा?
मिस्र की सेना क्षेत्र की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है। यदि संसद से मंजूरी मिलती है और सेना रियाद पहुंचती है, तो मिस्र एक बड़े युद्ध में फंस सकता है। हूती विद्रोहियों के पास मिस्र तक मार करने वाले हथियार हैं, और उन्होंने इजरायल पर हमले करके अपनी क्षमता साबित की है। हूती विद्रोहियों ने मिस्र को चेतावनी दी है कि यदि वह इस दिशा में बढ़ता है, तो यह उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
