मिस्र में ड्रग्स मामले में टीवी प्रेजेंटर सारा खलीफा को मिली मौत की सजा
मिस्र में ड्रग्स से जुड़े मामले में सजा
नई दिल्ली: मिस्र की अदालत ने एक बड़े ड्रग्स मामले में टीवी प्रेजेंटर सारा खलीफा सहित 12 व्यक्तियों को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी को एक आपराधिक संगठन का सदस्य माना, जो विदेशों से ड्रग्स बनाने के लिए कच्चा माल मंगाता था और उसे नशीली दवाओं में परिवर्तित कर बेचता था। जांच में आरोपियों के पास अवैध हथियार और गोलियां भी पाई गईं।
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, मिस्र के सरकारी समाचार पत्र अल-अहराम ने इस फैसले की जानकारी दी है। अदालत ने यह निर्णय पिछले महीने लिया था, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि हाल ही में हुई है। मिस्र में मौत की सजा से संबंधित मामलों में अदालत को देश के ग्रैंड मुफ्ती से धार्मिक सलाह लेना आवश्यक होता है। इस प्रक्रिया के बाद सजा की पुष्टि की गई।
ड्रग्स की भारी मात्रा बरामद
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में कई सबूत पेश किए। अधिकारियों ने 750 किलो से अधिक नशीली दवाएं जब्त की थीं, साथ ही ड्रग्स बनाने में उपयोग होने वाला कच्चा माल भी बरामद किया गया। इस मामले में 20 गवाहों ने सरकारी वकील के समक्ष बयान दिए। जांच एजेंसियों को इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी मिले, जिसमें आरोपियों की बातचीत के रिकॉर्ड और वीडियो क्लिप शामिल थे।
अदालत ने आरोपियों को ड्रग्स की तस्करी और बलात्कार का दोषी ठहराया, लेकिन इन अपराधों में जानबूझकर हत्या का आरोप नहीं था। अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार मानकों के अनुसार, ऐसे मामलों में मौत की सजा का उपयोग सीमित रखने की सिफारिश की जाती है।
सारा खलीफा ने आरोपों का किया खंडन
39 वर्षीय सारा खलीफा मिस्र की एक प्रसिद्ध टीवी प्रेजेंटर हैं, जो 'मिशन इम्पॉसिबल' नामक कार्यक्रम के लिए जानी जाती हैं, जिसमें अपराध से जुड़े मामलों पर चर्चा होती थी। उन्होंने अपने खिलाफ सभी आरोपों को खारिज किया है। पिछले साल सितंबर में सुनवाई के दौरान, जज ने उनसे मामले में उनकी कथित भूमिका के बारे में सवाल किए थे। सारा ने कहा कि उन्होंने कभी ड्रग्स नहीं देखे।
सारा के अनुसार, उन्होंने पहली बार ड्रग्स तब देखे जब एंटी-नारकोटिक्स अथॉरिटी के दफ्तर में उनके साथ तस्वीर खींची गई थी। एमनेस्टी इंटरनेशनल की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, उस वर्ष मिस्र की अदालतों ने 492 लोगों को मौत की सजा सुनाई थी, जबकि 23 लोगों को फांसी दी गई।
