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यमन के हूतियों ने सऊदी टैंकरों पर किया हमला, बढ़ा तनाव

यमन के हूतियों ने हाल ही में सऊदी अरब के दो ऑयल टैंकरों पर हमला किया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। अंसारुल्लाह ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है और कहा है कि यह सऊदी अरब के खिलाफ उनकी समुद्री नाकेबंदी का हिस्सा है। इस हमले के बाद, सऊदी अरब ने भी प्रतिक्रिया दी है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित परिणाम।
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यमन में सऊदी टैंकरों पर हमला

सऊदी अरब ने ईरान समर्थित यमन के अंसारुल्लाह के साथ दुश्मनी मोल ली है, और अब स्थिति गंभीर होती जा रही है। यमन के हूती जब एक बार सक्रिय हो जाते हैं, तो वे रुकते नहीं हैं। अमेरिका और इजराइल जैसे देशों ने भी उनसे दूरी बना ली है। हाल ही में, सऊदी ने ईरान की प्रमुख एयरलाइंस के एक विमान पर हमला किया, जिसके बाद हूतियों ने सऊदी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी। अब खबर आई है कि हूतियों ने लाल सागर में सऊदी के दो ऑयल टैंकरों को नष्ट कर दिया है। उनका आरोप है कि ये जहाज उनके द्वारा घोषित समुद्री नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहे थे। इन टैंकरों के नाम एनसेलिया और लैला बताए जा रहे हैं। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने एनसेलिया पर हमले की पुष्टि की है। 


अंसारुल्लाह का बयान

यमन के अंसारुल्लाह आर्म फोर्सेस के प्रवक्ता याहिया सारी ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के खिलाफ 12 वर्षों से चल रहे प्रतिबंधों का अब जवाब दिया जाएगा। उनका कहना है कि सऊदी के टैंकर समुद्री नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहे थे, इसलिए यह कार्रवाई की गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एनसेलिया टैंकर ने संकट संदेश भेजा था कि उसे एक मिसाइल ने निशाना बनाया है, जिससे उसमें आग लग गई। ब्रिटेन की समुद्री जोखिम प्रबंधन कंपनी वैनगार्ड ने भी इस हमले की पुष्टि की है। 


हूती का दावा

हूती ने यह भी कहा है कि जब से उन्होंने समुद्री नाकेबंदी लागू की है, तब से लगभग 10 जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है। 20 जुलाई को, अंसारुल्लाह ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की थी। ब्रिगेडियर जनरल याहिया सारी ने कहा था कि यह नाकेबंदी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और यह सऊदी के कार्यों का जवाब है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब की किसी भी गलत हरकत का जवाब निर्णायक तरीके से दिया जाएगा। अंसारुल्लाह ने सऊदी सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने 2015 के बाद से यमन पर प्रतिबंध लगाकर लाखों लोगों की जान ली है।