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यमन में हूती विद्रोहियों का मायून द्वीप पर नियंत्रण, वैश्विक तेल बाजार में बढ़ा तनाव

यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने मायून द्वीप पर नियंत्रण कर लिया है, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों पर तनाव बढ़ गया है। इस घटनाक्रम ने कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी उछाल की आशंका को जन्म दिया है। सऊदी अरब ने अपनी एक पाइपलाइन पर हमले के बाद उसे बंद कर दिया है, जबकि इराक ने हमले की निंदा की है। जानें इस संघर्ष का वैश्विक बाजार पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
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यमन में संघर्ष का नया मोड़

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष में एक नया और गंभीर मोड़ आया है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के दक्षिणी द्वार पर स्थित मायून (पेरिम) द्वीप पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इस घटना ने वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों पर तनाव को बढ़ा दिया है, जिससे कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में वृद्धि की संभावना बढ़ गई है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और हूती अधिकारियों ने इस द्वीप पर कब्जे की पुष्टि की है, जिसे हाल के वर्षों में हूती विद्रोहियों का सबसे बड़ा क्षेत्रीय विस्तार माना जा रहा है।


हूती विद्रोहियों का क्षेत्रीय विस्तार

हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास अपने क्षेत्रीय प्रभाव को बढ़ाया है, जो दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इस घटनाक्रम से ईरान को अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए तेल और गैस की कीमतें बढ़ाने की अपनी रणनीति को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इस बीच, सऊदी अरब ने अपनी एक पाइपलाइन पर हमले के बाद उसे बंद करने का निर्णय लिया है।


सऊदी अरब की पाइपलाइन पर हमला

सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह निर्णय 'एहतियाती उपाय' के रूप में लिया गया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इस हमले के लिए इराक से आए ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया है। सरकारी समाचार एजेंसी ने बताया कि सऊदी अरब ने हमले का जवाब नहीं देने का निर्णय लिया है, ताकि इराकी सरकार को आवश्यक कदम उठाने का अवसर मिल सके।


इराक की प्रतिक्रिया

इराक की सरकार ने इस हमले की निंदा की है और जांच के आदेश दिए हैं। सऊदी अरब और अमेरिका ने जुलाई में इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया पर बमबारी की थी, जिन पर सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमलों का आरोप था। हूती विद्रोहियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली थी।


ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का महत्व

क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, हूतियों ने 'इराकी मिलिशिया' को हमलों की योजना बनाने में मदद की थी। अस्सी के दशक में स्थापित ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ने ईरान युद्ध के दौरान सऊदी अरब की तेल निर्यात क्षमता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, जून की शुरुआत तक सऊदी अरब ने पाइपलाइन के अंतिम छोर पर स्थित लाल सागर के बंदरगाह से तेल निर्यात को दोगुना कर दिया था। हूती विद्रोहियों द्वारा मायून द्वीप पर कब्जे की पुष्टि यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और हूती अधिकारी ने की है।