यमन में हूती विद्रोहियों का सऊदी अरब पर दबाव बढ़ा, अमेरिका ने एंबेसी कर्मचारियों को निकाला
हूती विद्रोहियों का सऊदी अरब पर बढ़ता दबाव
यमन के हूती विद्रोही अंसारुल्लाह ने सऊदी अरब में स्थिति को इतना गंभीर बना दिया है कि अमेरिका भी चिंतित हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों और उनके परिवारों को तुरंत देश छोड़ने का आदेश दिया है। हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण सऊदी अरब की स्थिति और भी खराब हो रही है, जिससे अमेरिका को यह डर सता रहा है कि कहीं हूती विद्रोही उनके ठिकानों को निशाना न बना लें। अमेरिका ने अब तक हूती विद्रोहियों के खिलाफ सीधे तौर पर कोई कार्रवाई नहीं की है, और यमन में उनके साथ संघर्ष का अनुभव भी अच्छा नहीं रहा है। हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों, तेल सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचों पर कई हमले किए हैं। हाल ही में हुए हमलों में तीन लोगों की जान गई है, जिसमें दम्माम के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला और एक तेल सुविधा पर ड्रोन हमला शामिल है।
अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ-साथ अपनी अन्य दूतावासों के कर्मचारियों को भी यूएई, जॉर्डन, कतर और बहरीन से जाने का आदेश दिया है। अमेरिकी प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने पुष्टि की है कि यह आदेश केवल उन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों पर लागू होता है, जिनकी वहां मौजूदगी आवश्यक नहीं है।
अमेरिकी कर्मचारियों को हटाने का कारण सऊदी अरब में आम लोगों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमले बताए जा रहे हैं। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंसारुल्लाह सऊदी अरब पर और भी अधिक हमले कर सकते हैं। सऊदी अरब के सीमावर्ती प्रांतों पर भी खतरा मंडरा रहा है। ब्राजीलियाई पत्रकार पेपे का कहना है कि यमन के अंसारुल्लाह बाहरी हमलों के जरिए सऊदी अरब को नहीं जीतेंगे, बल्कि स्थानीय लोग ही उन्हें चुनौती देंगे।
दरअसल, नजरान, जिजान और असीर ये तीन प्रांत 1934 से पहले यमन का हिस्सा थे, लेकिन उस वर्ष सऊदी अरब और यमन के बीच युद्ध के बाद सऊदी ने इन क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया। रिपोर्टों के अनुसार, आज भी वहां के लोग खुद को यमनी मानते हैं।
हाल ही में जारी अमेरिकी सुरक्षा अलर्ट में कहा गया था कि अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों को किसी भी सऊदी हवाई अड्डे का उपयोग करने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होगी। हूती विद्रोहियों ने बार-बार रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाया है, जिसके कारण यह हवाई अड्डा 10 अक्टूबर से बंद था। हालांकि, हाल ही में कुछ सऊदी एयरलाइंस की उड़ानें फिर से शुरू हुई हैं। लेकिन लुफ्थांसा और एयर फ्रांस जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने नवंबर के मध्य तक अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं।
यमन के तीसरे सबसे बड़े शहर ताईच को हूतियों ने चारों ओर से घेर लिया है, जिससे सऊदी अरब को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ताईच शहर यमन के दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्र का अंतिम अभेद्य किला माना जाता है, जो अदन और बाब अल मंदेब के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। यदि हूती विद्रोही ताईच पर पूरी तरह से नियंत्रण प्राप्त कर लेते हैं, तो यह सऊदी अरब के लिए एक बड़ा झटका होगा।
