यमन में हूती विद्रोहियों की बढ़ती ताकत, सऊदी अरब को बड़ा झटका
यमन में सऊदी अरब समर्थित बलों को झटका
यमन में सऊदी अरब के सहयोगी बलों को एक गंभीर झटका लगा है। हूती विद्रोहियों ने मोखा, जो कि यमन की सरकार के नियंत्रण में था, के साथ-साथ बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के निकट स्थित पेरीम द्वीप पर भी कब्जा कर लिया है। अब हूती विद्रोहियों का नियंत्रण यमन के लाल सागर से सटे सभी तटों पर हो चुका है। यह स्थिति सऊदी अरब के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे उसके तेल निर्यात पर खतरा मंडरा रहा है।
तेल बाजार में उथल-पुथल
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से पहले ही तेल का निर्यात ठप हो चुका है। ऐसे में हूती विद्रोहियों की यह बढ़त वैश्विक तेल बाजार में हलचल पैदा कर सकती है। विद्रोहियों ने 20 जुलाई से सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की हुई है। इस घटनाक्रम के चलते तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, और अमेरिका में डीजल की औसत कीमत 6 डॉलर के पार जा चुकी है।
हूतियों का कब्जा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के रणनीतिक द्वीप पेरीम पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। सरकारी बलों के पीछे हटने के बाद विद्रोही नावें वहां पहुंच गई हैं। इसके अलावा, विद्रोहियों ने हनीश द्वीप पर भी हमला किया है, जो मोखा के निकट स्थित एक महत्वपूर्ण द्वीप है।
सऊदी अरब को कोई मोहलत नहीं
हूती विद्रोहियों ने एक बयान में कहा है कि लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को कोई खतरा नहीं है, लेकिन उन्होंने सऊदी अरब को कोई मोहलत न देने की चेतावनी दी है। विद्रोहियों ने बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाने की योजना भी बनाई है। दूसरी ओर, सऊदी अरब की सेना और यमन के सरकारी बल अलग-अलग स्थानों पर बमबारी कर रहे हैं।
मोखा का महत्व
मोखा यमन का एक ऐतिहासिक बंदरगाह शहर है, जो पहले यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण में था। हालिया संघर्ष के बाद, हूती विद्रोहियों ने यहां अपना कब्जा जमा लिया है। मोखा से बाब अल-मंडेब की दूरी लगभग 75 किमी है, और विद्रोही मोखा के बाद पूरे बाब अल-मंडेब पर नियंत्रण स्थापित करना चाहते हैं।
सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन पर हमला
सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन, जो अबकैक से यानूब तक फैली हुई है, पर भी बड़ा हमला हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, पाइपलाइन के 109 किमी लंबे हिस्से में कई स्थानों पर आग और धुआं देखा गया है। यह पाइपलाइन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के बाद सऊदी अरब इसी के माध्यम से अपना कच्चा तेल लाल सागर के अपने पोर्ट तक पहुंचाता है।
