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यमन में हूती विद्रोहियों के हमले से सऊदी अरब के साथ तनाव बढ़ा

यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर किए गए घातक हमले ने सऊदी अरब के साथ उनके संघर्ष को और बढ़ा दिया है। इस हमले में 13 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना क्षेत्रीय तनाव और यमन में एक दशक से चल रहे युद्ध के प्रभावों को दर्शाती है। हूती विद्रोही सऊदी अरब के साथ अपने संबंधों को पुनः परिभाषित करने की कोशिश कर रहे हैं। जानें इस संघर्ष के पीछे की जटिलताएँ और यमन के नागरिकों की स्थिति।
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यमन के हूती विद्रोहियों का घातक हमला

(लॉरेण्ट बोनेफोय, साइंसेज पीओ) पेरिस, 15 अक्टूबर - यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर किए गए हमले ने सऊदी अरब के साथ उनके बढ़ते संघर्ष को उजागर किया है। यह हमला 10 अक्टूबर को हुआ, जिसमें 13 लोगों की जान गई और कई अन्य घायल हुए। यह घटना फरवरी में ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद से सऊदी अरब में हुई सबसे गंभीर घटना है। इसके बाद भी मिसाइल हमले जारी रहे। यमन के राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ये घटनाएं पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और यमन में एक दशक से चल रहे युद्ध के प्रभावों को दर्शाती हैं।


हूती विद्रोहियों का उदय

हूती आंदोलन 2004 में यमन में एक सशस्त्र राजनीतिक ताकत के रूप में उभरा। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सऊदी समर्थित सरकार के खिलाफ गृहयुद्ध में शामिल है। वर्तमान में, हूती विद्रोही देश के लगभग एक-तिहाई क्षेत्र और दो-तिहाई जनसंख्या पर नियंत्रण रखते हैं। उन्होंने लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों और ड्रोन का एक बड़ा जखीरा तैयार किया है। हालांकि, उन्हें अक्सर ईरान का प्रतिनिधि संगठन माना जाता है, लेकिन उनके विकास का संबंध यमन की घरेलू राजनीति और ऐतिहासिक संघर्षों से भी है।


हमले के बाद का तनाव

लेख के अनुसार, जुलाई 2026 में सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को फिर से खोलने के प्रयास के दौरान तनाव बढ़ा। 13 जुलाई को सऊदी सेना ने हवाई अड्डे पर बमबारी की, जब एक विमान तेहरान से वहां पहुंचने वाला था। हूती विद्रोहियों ने इसे सऊदी अरब के साथ टकराव को तेज करने का अवसर माना। अब वे सऊदी अरब के बंदरगाहों और तेल निर्यात से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं।


क्षेत्रीय संघर्ष की संभावना

यह स्पष्ट नहीं है कि हूती विद्रोहियों के आक्रामक अभियान के परिणाम क्या होंगे। क्षेत्र में संघर्ष जारी रहने की संभावना है। अमेरिका जैसे देशों की भागीदारी पर भी सवाल उठते हैं, क्योंकि अमेरिका अब तक पूर्ण पैमाने पर युद्ध में शामिल होने से बचता रहा है। लेकिन इन घटनाओं के बीच यमन के नागरिकों की स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह उन लोगों की पीड़ा को दर्शाता है, जो एक दशक से अधिक समय से जारी युद्ध से थक चुके हैं।