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यमन में हूथियों द्वारा चीनी तकनीक से विकसित किया जा रहा नया मिसाइल सिस्टम

यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोही एक नया और उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जिसमें चीनी कलपुर्जों का उपयोग किया जा रहा है। यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे यह तकनीक हूथियों की सटीकता और मारक क्षमता को बढ़ा रही है। चीन ने इस मामले में कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हूथियों तक चीनी पुर्जों की पहुंच कैसे हुई। जानें इस विषय में और क्या जानकारी है।
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हूथी विद्रोहियों का नया बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम

यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोही एक अत्याधुनिक मध्यम दूरी का बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम तैयार कर रहे हैं, जिसमें चीनी कलपुर्जों का उपयोग किया जा रहा है। यूके स्थित हथियार निगरानी संस्था 'कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च ग्रुप' (CARG) की हालिया रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। इस तकनीक से हूथियों की चीन पर निर्भरता बढ़ रही है, जिससे उन्हें सऊदी अरब और इजरायल को अधिक सटीकता और मारक क्षमता के साथ निशाना बनाने की क्षमता प्राप्त होगी। CARG के अनुसार, यह नया मिसाइल सिस्टम ईरान की अत्याधुनिक 'खैबर शेकन' मिसाइल तकनीक पर आधारित है, जो एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम है और इसकी मारक क्षमता लगभग 1,200 मील (2,000 किलोमीटर) तक है.


खैबर शेकन मिसाइल की क्षमताएँ

'खैबर शेकन' मिसाइल 1,200 मील (2,000 किलोमीटर) की दूरी तक अपने लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। 'द एसोसिएटेड प्रेस' के अनुसार, CARG के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिन्ज़ ने कहा, "हूथियों की हथियार निर्माण की महत्वाकांक्षाएँ हमारी पूर्व धारणाओं से कहीं अधिक हैं। इन पुर्जों को बनाने के लिए मिसाइल डिज़ाइन से संबंधित जानकारी की आवश्यकता होती है।" हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि "ये ऐसे उपकरण नहीं हैं जिनका उपयोग सामान्य नागरिक कार्यों के लिए किया जा सके।"


चीन की प्रतिक्रिया

चीन ने CARG की रिपोर्ट को न तो स्वीकार किया है और न ही इससे इनकार किया है। वाशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू चांग ने कहा कि बीजिंग कुछ अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन कर रहा है। चीन, सऊदी अरब और ईरान से कच्चा तेल खरीदने वाला एक प्रमुख देश है, लेकिन उसने सऊदी अरब के हवाई अड्डों पर हूथी हमलों की निंदा की है और संघर्ष को कम करने का आह्वान किया है।


हूथियों तक चीनी पुर्जों की पहुंच

CARG की रिपोर्ट यमन के अधिकारियों द्वारा जुलाई में दी गई जानकारी पर आधारित है, जब अधिकारियों ने दो खेपों को रोका था, जिनमें संदिग्ध उपकरण पाए गए थे। ये खेपें चीन से आई थीं और इन्हें यमन के होदेइदाह बंदरगाह पर पहुँचाया जाना था। इज़रायल का मानना है कि ईरान इस बंदरगाह का उपयोग हथियारों की तस्करी के लिए करता है।


मिसाइल निर्माण के लिए आवश्यक पुर्जे

इन खेपों में मिसाइल के काम करने के लिए आवश्यक पुर्जे शामिल थे, जैसे स्टेबिलाइज़िंग फिन कोर, नोज़ल अटैचमेंट वाले रॉकेट मोटर के पिछले हिस्से और रॉकेट मोटर इग्नाइटर। इसके अलावा, खेप में फेनोलिक रेज़िन भी था, जिसका उपयोग 'एब्लेटिव हीट शील्ड' बनाने में किया जाता है। ये शील्ड बैलिस्टिक मिसाइलों को तेज सुपरसोनिक गति से उड़ान भरने के दौरान उत्पन्न होने वाली अत्यधिक गर्मी से बचाती हैं।


तस्करी की चुनौतियाँ

हिन्ज़ ने कहा कि इन सामग्रियों से स्पष्ट होता है कि हूथी विद्रोही ईरान द्वारा डिज़ाइन की गई एक विशेष प्रकार की मिसाइल को असेंबल करना चाहते थे। उन्होंने कहा, "इस तरह के सिस्टम की तस्करी करना बहुत कठिन है। इन्हें आसानी से खोलकर दोबारा जोड़ना संभव नहीं है।"


अंतरराष्ट्रीय समाचार

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