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यूरोप में भीषण गर्मी से बढ़ी मौतों की संख्या, बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

यूरोप इस साल भीषण गर्मी की चपेट में है, जिसके कारण 10,000 से अधिक लोगों की जान चली गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्गों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है। तापमान में रिकॉर्ड वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के कारण यह स्थिति और भी गंभीर हो गई है। जानिए किन देशों में सबसे अधिक मौतें हुईं और इस गर्मी का क्या असर पड़ा है।
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यूरोप में गर्मी का कहर

इस वर्ष यूरोप भीषण गर्मी की चपेट में है, जिसके कारण तापमान में वृद्धि से संबंधित घटनाओं में 10,000 से अधिक लोगों की जान चली गई है। इस स्थिति का सबसे अधिक प्रभाव 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों पर पड़ा है।


तापमान में रिकॉर्ड वृद्धि

विशेषज्ञों के अनुसार, जून के अंत में कई देशों में तापमान ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे मौतों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में इस प्रकार की भीषण गर्मी पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रही है। यूरोप के मृत्यु निगरानी केंद्र यूरोएमओएमओ के अनुसार, 28 जून को समाप्त सप्ताह में सामान्य दिनों की तुलना में लगभग 14,260 अधिक मौतें दर्ज की गईं, जिनमें से 12,000 से अधिक बुजुर्गों की थीं।


बुजुर्गों की मौतों का बढ़ता आंकड़ा

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के कारण दिल का दौरा, डिहाइड्रेशन और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। कई बार गर्मी से होने वाली मौतों को अन्य कारणों से जोड़ा जाता है, जिससे ये आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल नहीं हो पातीं।


प्रभावित देशों की सूची

यूरोएमओएमओ के अनुसार, फ्रांस, बेल्जियम और जर्मनी में सामान्य से अधिक मौतों की घटनाएं सामने आई हैं। जर्मनी में जुलाई की शुरुआत तक गर्मी से 6,830 मौतें हुईं, जिनमें से 6,470 बुजुर्ग थे। ब्रिटेन की मौसम एजेंसी के अनुसार, मई और जून के दौरान इंग्लैंड और वेल्स में लगभग 2,700 मौतें गर्मी से संबंधित थीं। फ्रांस में 22 से 28 जून के बीच पिछले सप्ताह की तुलना में लगभग 2,000 अधिक मौतें हुईं। स्पेन में गर्मी से 937 लोगों की जान गई, जबकि बेल्जियम में 18 जून से 1 जुलाई के बीच 1,747 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं। नीदरलैंड में भी इस साल गर्मी से लगभग 480 लोगों की मौत हुई है।


2003 के बाद से बढ़ता खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में यूरोप में गर्मी लगातार बढ़ रही है, लेकिन 2003 को सबसे खतरनाक वर्ष माना जाता है, जब गर्मी के कारण लगभग 70,000 लोगों की जान गई थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि कोयला, तेल और गैस जैसे ईंधनों के अधिक उपयोग से जलवायु परिवर्तन तेज हो रहा है, जिससे हीटवेव पहले से अधिक खतरनाक होती जा रही है।