येरेवान में संसद में हंगामा: राजनीतिक विवाद ने बढ़ाई स्थिति
संसद में बेकाबू हुआ माहौल
येरेवान में संसद की बैठक के दौरान स्थिति उस समय बिगड़ गई जब दो राजनीतिक दलों के सदस्यों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ। कुछ ही समय में सदन की शांति भंग हो गई और प्रतिनिधि एक-दूसरे से शारीरिक रूप से भिड़ने लगे। गवाहों ने देखा कि सांसद एक-दूसरे की ओर बढ़ते हुए धक्का-मुक्की कर रहे थे।
सुरक्षा कर्मियों की जरूरत पड़ी
इस दौरान कुर्सियों और पानी की बोतलों का भी इस्तेमाल किया गया। सदन में रखी मेजों को नुकसान पहुंचा और सुरक्षा कर्मियों को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आगे आना पड़ा। विवाद इतना बढ़ गया कि झड़पें संसद भवन के गलियारों तक फैल गईं।
नए मंत्रालय का प्रस्ताव बना विवाद का कारण
इस घटनाक्रम की शुरुआत विपक्षी दल स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया द्वारा पेश किए गए एक प्रस्ताव से हुई। पार्टी ने प्रशासनिक ढांचे में नए मंत्रालय के गठन का वादा किया था। इसी पर चर्चा के दौरान सत्ताधारी सिविल कॉन्ट्रैक्ट पार्टी के सदस्य तारोन चाखोयान ने विपक्ष पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, जिससे माहौल और गरमा गया।
व्यक्तिगत हमलों ने बढ़ाई तनाव
चाखोयान की टिप्पणियों के बाद सदन में नाराजगी फैल गई। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने विपक्षी नेता नारिक करापेत्यान के आचरण पर सवाल उठाए। इसके जवाब में विपक्षी सदस्य अपनी जगह से उठकर सत्तापक्ष के सांसद की ओर बढ़ने लगे, जिससे धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
उपाध्यक्ष का भी विवाद में नाम
इस दौरान उपाध्यक्ष वाहागन अलेक्सान्यान ने विपक्षी सदस्यों की ओर कुर्सी फेंकी। वहीं, चाखोयान ने विपक्षी सांसद गार्निक दावत्यन पर पानी फेंका। इस दौरान बोतलें भी हवा में उछाली गईं और फर्नीचर को नुकसान पहुंचा। सुरक्षा कर्मियों ने बीच में आकर सदस्यों को अलग करने की कोशिश की, लेकिन तनाव कम करने में समय लगा।
संसद की कार्यवाही का प्रसारण जारी
हंगामे के बीच एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि संसद का सीधा प्रसारण जारी रहा। स्पीकर रुबेन रुबिन्यान ने कहा कि नागरिकों को सदन में हो रही घटनाओं को देखने का अधिकार है। इस कारण पूरा घटनाक्रम सार्वजनिक रूप से प्रसारित होता रहा।
घायल सांसदों के लिए एंबुलेंस बुलाई गई
घटना के बाद संसद परिसर में चिकित्सा सहायता के लिए एंबुलेंस पहुंचीं। घायल सदस्यों को अस्पताल ले जाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी सांसद आंद्रानिक गेवरग्यान की नाक से खून बह रहा था, जबकि रूबेन मखितार्यान के कपड़े फटे हुए थे। इस घटना ने आर्मेनिया की राजनीतिक व्यवस्था और सदन में जनप्रतिनिधियों के व्यवहार पर चर्चा को बढ़ावा दिया है।
