रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की श्रीलंका यात्रा: द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज श्रीलंका के लिए यात्रा की शुरुआत की, जहां वे स्थानीय नेताओं के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। उनकी यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच पारंपरिक मित्रता को बढ़ावा देना है। सिंह ने श्रीलंका को भारत का महत्वपूर्ण साझेदार बताया और उम्मीद जताई कि उनकी बातचीत लाभदायक होगी। भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध और आर्थिक सहयोग की पृष्ठभूमि में, यह यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जानें इस यात्रा के प्रमुख पहलुओं और भारत की प्रतिबद्धता के बारे में।
| Sep 8, 2026, 15:40 IST
रक्षा मंत्री की श्रीलंका यात्रा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ श्रीलंका के लिए रवाना हुए हैं। उनकी यात्रा का उद्देश्य श्रीलंकाई नेताओं के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करना है, ताकि दोनों देशों के बीच पारंपरिक और मित्रवत संबंधों को और मजबूत किया जा सके, जिससे दोनों पक्षों को लाभ हो। रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर इस यात्रा की जानकारी साझा की है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि सिंह कोलंबो में भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे। यात्रा के दौरान, सिंह ने उम्मीद जताई कि श्रीलंकाई अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत लाभदायक होगी। उन्होंने श्रीलंका को 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति और 'महासागर' (MAHASAGAR) ढांचे के तहत भारत का महत्वपूर्ण साझेदार बताया।
भारत-श्रीलंका संबंध
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध और विभिन्न प्रकार की साझेदारियां हैं, जो क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा, आर्थिक और व्यापारिक सहयोग पर आधारित हैं। बयान में कहा गया है कि दोनों देशों के संबंध तब और मजबूत हुए जब भारत ने श्रीलंका को आर्थिक संकट के दौरान सहायता प्रदान की और 2025 में आए चक्रवात 'डिटवाह' के बाद मदद करने वालों में से एक बना।
भारत की प्रतिबद्धता
इससे 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'महासागर' (MAHASAGAR - Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) के दृष्टिकोण के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता का पता चलता है। इससे पहले, नई दिल्ली ने चक्रवात 'डिटवाह' के बाद श्रीलंका में पुनर्निर्माण कार्यों के लिए 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर का आर्थिक सहायता पैकेज शुरू किया था। इस पैकेज का उद्देश्य परिवहन अवसंरचना का पुनर्निर्माण, आवास की मरम्मत, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारना, कृषि को पुनर्जीवित करना और आपदा प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ाना था।
