रावलकोट में फिर भड़की हिंसा: प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाबलों की फायरिंग से कई की मौत
रावलकोट में तनावपूर्ण स्थिति
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के रावलकोट में हालात एक बार फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं। स्थानीय निवासियों के विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों की कथित फायरिंग के कारण पूरे क्षेत्र में हिंसा भड़क उठी। इस घटना में कई लोगों के मारे जाने की सूचना है, जिसके बाद गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए सुरक्षा बढ़ा दी है और संचार सेवाओं पर कई पाबंदियां भी लगा दी गई हैं।
प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच टकराव
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रावलकोट में बड़ी संख्या में लोग अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे थे। इसी दौरान सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। आरोप है कि स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षाबलों ने फायरिंग की, जिसमें कई लोगों की जान चली गई। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का कहना है कि रावलकोट में कम से कम नौ लोगों की मौत हुई है, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में मृतकों की संख्या इससे अधिक बताई जा रही है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
मृतकों की सूची जारी
घटना के बाद, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने एक हाथ से लिखी सूची साझा की है, जिसमें मृतकों के नाम शामिल हैं। सूची में उस्मान नजीर, काशिफ, मोहम्मद इब्राहिम, अर्सल असगर, हनीफ मोहम्मद बशीर, वसीम अफजल, बासित शाह और साबिर खान जैसे कई लोगों का नाम है। संगठन का कहना है कि प्रदर्शन पूरी तरह से लोगों की मांगों को लेकर था, लेकिन अचानक हालात हिंसक हो गए।
जून से जारी हैं विरोध प्रदर्शन
रावलकोट और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के अन्य क्षेत्रों में जून की शुरुआत से ही विरोध प्रदर्शन जारी हैं। कई बार लोगों ने धरना दिया, बाजार बंद रखे और सार्वजनिक परिवहन भी प्रभावित हुआ। स्थानीय संगठनों का कहना है कि लंबे समय से विभिन्न मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है। इन प्रदर्शनों के दौरान कई बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस या अर्धसैनिक बलों के बीच झड़पें भी हुई हैं।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शन कर रहे लोगों की कई मांगें हैं, जिनमें स्थानीय विधानसभा में आरक्षित 12 सीटों की व्यवस्था समाप्त करना, क्षेत्र के लोगों को अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना, गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं को रिहा करना, और बिजली, महंगाई तथा अन्य आर्थिक समस्याओं का समाधान शामिल है। प्रदर्शनकारी बेहतर प्रशासन और स्थानीय लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है।
