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रूस का गल्फ सुरक्षा ढांचे में ईरान की भागीदारी का प्रस्ताव: लावरोव का बयान

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने गल्फ क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने ईरान को मक्का समझौते के सुरक्षा ढांचे में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है। लावरोव ने इस पहल को सीमित न रखने की बात कही और अन्य देशों के लिए भी इसमें शामिल होने का अवसर देने का सुझाव दिया। इसके अलावा, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर की भूमिका पर भी विचार साझा किए। इस लेख में रूस की नई सुरक्षा पहल और इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई है।
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रूस की नई पहल


नई दिल्ली: रूस ने गल्फ क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत दिया है। विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि यदि ईरान को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की द्वारा प्रस्तावित मक्का समझौते के सुरक्षा ढांचे में शामिल किया जाता है, तो यह पूरे क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।


मक्का समझौते का महत्व

लावरोव ने मॉस्को स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए मक्का समझौते को सामूहिक सुरक्षा और रक्षात्मक सहयोग की संभावित व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इस पहल को केवल कुछ गल्फ देशों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि अन्य देशों के लिए भी इसमें शामिल होने का अवसर उपलब्ध होना चाहिए।


ईरान की भागीदारी पर जोर

लावरोव ने बताया कि यदि ईरान को इस सुरक्षा ढांचे में शामिल करने के लिए सहमति बनती है, तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक व्यावहारिक कदम होगा। उन्होंने मिस्र का भी उल्लेख किया और कहा कि अगर अल्जीरिया जैसे देश इस पहल में रुचि दिखाते हैं, तो इससे क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूती मिलेगी।


संवाद का साझा मंच

रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि रूस लंबे समय से गल्फ देशों, अरब राजशाहियों और ईरान के बीच संवाद का एक साझा मंच बनाने की कोशिश कर रहा है। उनका प्रस्ताव है कि इस मंच पर क्षेत्रीय देश अपनी चिंताओं और मतभेदों पर चर्चा करें और आपसी विश्वास बढ़ाने के उपाय खोजें। इसमें अरब लीग, ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों को भी शामिल करने का सुझाव दिया गया था।


डॉलर की भूमिका पर लावरोव का बयान

लावरोव ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर की भूमिका पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि रूस का लगभग 97 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय व्यापार अब युआन, यूएई की मुद्रा और अन्य राष्ट्रीय मुद्राओं में होता है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉलर के जरिए दबाव बनाने की स्थिति से बचने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन रूस इस प्रक्रिया में नेतृत्वकारी भूमिका नहीं निभाने का प्रयास करेगा।