रूस का पेचोरा S-125 एयर डिफेंस सिस्टम: मोबाइल अपग्रेड से मिलेगी भारत को नई ताकत
रूस का पेचोरा S-125 एयर डिफेंस सिस्टम
नई दिल्ली: रूस अपने पुराने लेकिन विश्वसनीय पेचोरा S-125 एयर डिफेंस सिस्टम को एक नई दिशा में अपग्रेड करने की योजना बना रहा है। इस अपग्रेड के बाद, यह सिस्टम स्थिर प्लेटफॉर्म से हटकर मोबाइल लॉन्चर के रूप में कार्य करेगा, जिससे इसकी क्षमता और घातकता में वृद्धि होगी। उल्लेखनीय है कि यही पेचोरा सिस्टम था जिसने 27 मार्च 1999 को कोसोवो युद्ध के दौरान अमेरिका के स्टील्थ फाइटर F-117 नाइटहॉक को नष्ट किया था। F-117 अमेरिका का पहला ऑपरेशनल स्टील्थ विमान था, इसलिए इस अपग्रेड को भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत के दो प्रमुख प्रतिकूल, चीन और पाकिस्तान, पहले से ही स्टील्थ फाइटर विमानों से लैस हैं। ऐसे में पेचोरा का आधुनिक रूप भारतीय वायुसेना के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक लाभ प्रदान कर सकता है।
पेचोरा सिस्टम की विशेषताएँ
पेचोरा क्या है?
पेचोरा एक सोवियत काल का छोटी से मध्यम दूरी का जमीन से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है, जिसे 1961 में पेश किया गया था। भारतीय वायुसेना ने इसे 1970 के दशक में अपने बेड़े में शामिल किया। इसकी मारक क्षमता 30 से 35 किलोमीटर तक है और यह 20 मीटर की ऊँचाई से लेकर 25 किलोमीटर ऊँचाई तक उड़ने वाले लक्ष्यों को नष्ट कर सकता है। इसे विशेष रूप से कम और मध्यम ऊँचाई वाले लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इसमें 4R90 यागाटन रडार है, जो 100 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के लक्ष्यों का पता लगा सकता है। यह सिस्टम भारी जैमिंग वाले माहौल में भी कार्य कर सकता है और जीपीएस से लैस है। इसे अकेले या पूरे एयर डिफेंस नेटवर्क के साथ मिलकर ऑपरेट किया जा सकता है।
भारत का अपग्रेड
भारत पहले ही कर चुका है अपग्रेड
भारतीय वायुसेना दशकों से इस सिस्टम का उपयोग कर रही है। लगभग 50 साल पुराना यह सिस्टम अब पूरी तरह से डिजिटल और आधुनिक हो चुका है। रक्षा मंत्रालय ने बेंगलुरु की कंपनी अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को 16 पेचोरा सिस्टम के अपग्रेड के लिए 591 करोड़ रुपये का ठेका दिया था, जिसका सफल परीक्षण पोखरण में किया गया है।
इस अपग्रेड में पुराने वैक्यूम ट्यूब वाले एनालॉग सिस्टम को हटाकर आधुनिक सेमीकंडक्टर चिप्स लगाए गए हैं, जिससे रिस्पॉन्स टाइम में काफी कमी आई है। इसके रडार और गाइडेंस सिस्टम को डिजिटल किया गया है, और नए ट्रांसमीटर, थर्मल इमेजिंग फायर कंट्रोल और स्वदेशी सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो जोड़े गए हैं। अब यह IACCS नेटवर्क से भी जुड़ा है।
रूस का नया मोबाइल अपग्रेड
रूस के नए मोबाइल अपग्रेड से क्या फायदा?
रूस अब इसे MZKT-8021, MZKT-8022 और MZKT-80211 चेसिस पर स्थापित करने की योजना बना रहा है। मोबाइल होने से भारत इसे सीमा पर तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर तैनात कर सकेगा। वर्तमान में, स्थिर स्थिति के कारण दुश्मन इसकी पोजीशन का पता लगा सकता है, लेकिन मोबाइल होने के बाद, चीन और पाकिस्तान के लिए इसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाएगा।
