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रूस का हिंद महासागर तक रेल संपर्क बनाने का प्रस्ताव

रूस के उपप्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने होर्मुज और बॉस्फोरस जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने के लिए हिंद महासागर तक रेल मार्ग बनाने की आवश्यकता व्यक्त की है। यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के संदर्भ में आया है, जिसने इन जलमार्गों पर जहाजों की आवाजाही को प्रभावित किया है। खुसनुलिन ने वैकल्पिक मार्गों की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जो भारत तक पहुंच प्रदान कर सकते हैं। इस प्रस्ताव का भू-राजनीतिक महत्व भी है, खासकर जब अमेरिका ने रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाने का विधेयक पेश किया है।
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रूस के उपप्रधानमंत्री का बयान

मॉस्को, 9 अगस्त - रूस के उपप्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने बताया कि होर्मुज और बॉस्फोरस जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर निर्भरता को कम करने के लिए हिंद महासागर तक रेल मार्ग का निर्माण आवश्यक है। खुसनुलिन की यह टिप्पणी अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के संदर्भ में आई है, जिसने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20% परिवहन करता है।


रेल संपर्क की संभावनाएं

खुसनुलिन ने बृहस्पतिवार को एक सरकारी समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा, "हिंद महासागर तक रेल संपर्क की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए।" उन्होंने यह भी बताया कि बॉस्फोरस और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े खतरों के कारण तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के माध्यम से वैकल्पिक मार्गों की आवश्यकता हो सकती है। भारत तक पहुंच प्रदान करने वाले किसी भी विकल्प को स्वीकार किया जाएगा।


जलमार्गों का महत्व

जहां होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है, वहीं बॉस्फोरस जलडमरूमध्य काला सागर को मारमारा सागर से जोड़ता है। तुर्किये ने कहा है कि बढ़ती चिंताओं के बावजूद यह जलमार्ग जहाजों के लिए खुला है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब रूस के ऊर्जा निर्यात पर पश्चिमी देशों का दबाव बढ़ रहा है।


अमेरिकी सीनेट का विधेयक

अमेरिकी सीनेट ने 29 जुलाई को एक विधेयक को आगे बढ़ाया है, जिसमें भारत सहित उन देशों पर भारी शुल्क लगाने का प्रावधान है, जो रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदना जारी रखते हैं। इस प्रस्ताव के भू-राजनीतिक निहितार्थ भी हो सकते हैं, क्योंकि यह ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के माध्यम से गुजरने और रूस को हिंद महासागर तक एक वैकल्पिक संपर्क मार्ग प्रदान करने की संभावना को जन्म देता है।