रूस में ईंधन संकट: पुतिन ने यूक्रेन युद्ध पर बातचीत की संभावना जताई
रूस में ईंधन की कमी का असर
नई दिल्ली: यूक्रेन के लगातार हमलों का प्रभाव अब रूस में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पहली बार, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्वीकार किया है कि इन हमलों के कारण देश में ईंधन की कमी महसूस की जा रही है। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में बातचीत की संभावना को नकारा नहीं किया जा सकता।
यूक्रेन के हमलों का प्रभाव
रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार वर्षों से चल रहे संघर्ष में, यूक्रेन ने लगातार रूस के तेल और गैस के ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों के कारण रूस की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कई क्षेत्रों में ईंधन की उपलब्धता पर असर पड़ा है। यूक्रेन का कहना है कि यह कार्रवाई रूस की ओर से उसके शहरों और ऊर्जा ढांचे पर किए जा रहे हमलों का जवाब है।
पुतिन का ईंधन संकट पर बयान
रूसी राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में कहा कि देश के ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों से कुछ समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। उन्होंने बताया कि रूस में फिलहाल ईंधन की सीमित कमी देखी जा रही है, लेकिन स्थिति गंभीर नहीं है। पुतिन ने यह भी कहा कि देश की प्राथमिकता हवाई सुरक्षा को मजबूत करना और क्रीमिया तक तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना है।
संभावित बातचीत का संकेत
पुतिन ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका के प्रतिनिधि जल्द ही मॉस्को आ सकते हैं, जहां यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, इस बयान का यह हिस्सा क्रेमलिन की आधिकारिक वेबसाइट पर नहीं आया, लेकिन इसे रूस की समाचार एजेंसियों द्वारा सार्वजनिक किया गया।
क्रीमिया में आपातकाल
रूस के कब्जे वाले क्रीमिया में भी हालात बिगड़ गए हैं। स्थानीय प्रशासन ने तेल और गैस की कमी के कारण आपातकाल घोषित किया है। अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेन द्वारा किए गए हमलों के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
ड्रोन हमलों का दबाव
हाल के दिनों में, यूक्रेन ने रूस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं, जिनमें रूस की दो प्रमुख तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब मॉस्को ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को मजबूत करने की योजना बना रहा था।
जेलेंस्की का बयान
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेनी ड्रोन ने रूस की दो तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया है। उनके अनुसार, रूस के ऊर्जा ढांचे पर हर सफल हमला उसकी युद्ध क्षमता को कमजोर करता है।
ईंधन आपूर्ति में बाधा
यूक्रेन के हालिया हमलों के बाद, रूस के कई हिस्सों में ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें आई हैं। कुछ शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि युद्ध का प्रभाव अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहा है।
