रूस में पुतिन की पार्टी की ऐतिहासिक जीत: क्या है इसके पीछे का सच?
पुतिन की सत्ता में मजबूती
नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की राजनीतिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है। हाल ही में हुए संसदीय चुनावों में उनकी निकटतम पार्टी, यूनाइटेड रशिया, ने शानदार जीत दर्ज की है। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, पार्टी को 450 सीटों वाली स्टेट ड्यूमा में 355 सीटें मिलने की संभावना है, जो कि अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
यूक्रेन युद्ध के बाद का महत्वपूर्ण चुनाव
यह चुनाव कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा था। 2022 में यूक्रेन के साथ युद्ध की शुरुआत के बाद, यह रूस में पहला संसदीय चुनाव था। पुतिन ने इसे अपनी नीतियों और यूक्रेन युद्ध पर जनता की राय के रूप में प्रस्तुत किया। मतदान 18 से 20 सितंबर तक तीन दिनों तक चला, जिसमें लगभग 11 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 59 प्रतिशत ने भाग लिया, जिसे क्रेमलिन ने जनसमर्थन के रूप में देखा है।
विपक्ष की स्थिति कमजोर
97 प्रतिशत से अधिक वोटों की गिनती के बाद चुनाव अधिकारियों ने बताया कि यूनाइटेड रशिया को 57 प्रतिशत से अधिक वोट मिले हैं। दूसरी ओर, कम्युनिस्ट पार्टी काफी पीछे रह गई। इस चुनाव में विपक्ष की उपस्थिति नगण्य रही, जिससे क्रेमलिन समर्थक दलों का प्रभाव और बढ़ गया।
पुतिन का बयान: जनता का समर्थन
चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए पुतिन ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों का मतदान करना इस बात का प्रमाण है कि जनता उनके प्रयासों के साथ है। उन्होंने इसे सेना और देश की सुरक्षा के लिए सरकार की नीतियों पर जनता की स्वीकृति बताया। पुतिन ने यूक्रेन में तैनात रूसी सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह वोट उनके साहस और बलिदान के लिए है। जनता को उनकी जीत और देश के प्रति समर्पण पर पूरा विश्वास है।
क्रेमलिन का संसद पर बढ़ता नियंत्रण
चुनाव आयोग के अनुसार, इस बार मतदान प्रतिशत 59.3 प्रतिशत रहा, जो पिछले कई चुनावों की तुलना में अधिक है। यूनाइटेड रशिया को तीन-चौथाई से अधिक बहुमत मिलने से अब स्टेट ड्यूमा पर क्रेमलिन का नियंत्रण और भी मजबूत हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जीत से पुतिन को यूक्रेन युद्ध के बीच घरेलू मोर्चे पर महत्वपूर्ण राजनीतिक मजबूती मिली है।
