रूस-यूक्रेन संघर्ष में AI का प्रोपेगैंडा: संगीत के जरिए युद्ध का प्रचार
AI का बढ़ता प्रभाव
नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में प्रोपेगैंडा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि AI की सहायता से ऐसे गाने बनाए जा रहे हैं, जिनमें रूसी सैनिकों की प्रशंसा की जा रही है और यूक्रेन के खिलाफ नकारात्मक संदेश दिए जा रहे हैं। ये गाने Spotify, YouTube, Apple Music और Deezer जैसे प्रमुख प्लेटफार्मों पर उपलब्ध हैं।
981 AI गानों की पहचान
यूक्रेनी गैर-लाभकारी संगठन Terrecon ने 981 ऐसे गानों की पहचान की है, जिन्हें रूस समर्थक युद्ध प्रचार से जोड़ा गया है। शोध के अनुसार, जिन गानों की रिलीज डेट ज्ञात हो सकी, उनमें से अधिकांश 2024 के बाद जारी हुए हैं। इस समय के दौरान Suno और Udio जैसे AI म्यूजिक टूल्स की लोकप्रियता भी बढ़ी है।
इन गानों की शैलियाँ भी विविध हैं। कुछ गाने भावुक बैलाड हैं, जबकि अन्य रॉक और हेवी मेटल शैली में हैं। कई गानों में रूसी सैनिकों को नायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जबकि कुछ में यूक्रेनियों के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया है। कुछ गाने पुराने सोवियत युद्ध गीतों की थीम को आधुनिक संगीत के साथ मिलाकर बनाए गए हैं।
लाखों बार सुने गए गाने
Terrecon के अनुसार, इन गानों को प्रमुख म्यूजिक प्लेटफार्मों पर लाखों बार सुना गया है। हालांकि, इनकी वास्तविक लोकप्रियता और श्रोताओं की संख्या का सही आकलन करना मुश्किल है। रिपोर्ट में एक AI द्वारा निर्मित गाने का भी उल्लेख है, जिसे YouTube पर दो साल में 20 लाख से अधिक व्यूज मिले हैं।
यह स्पष्ट नहीं है कि इन गानों के निर्माण या इंटरनेट पर प्रसार में रूसी सरकार की कितनी भूमिका है। फिर भी, Terrecon और अन्य मीडिया रिपोर्टों में रूस के सरकारी समर्थित सांस्कृतिक परियोजनाओं का उल्लेख किया गया है। एक रूसी अधिकारी के अनुसार, Internet Development Institute ने युद्ध से संबंधित 350 से अधिक कलात्मक परियोजनाओं को समर्थन दिया है।
AI प्लेटफॉर्म के सामने नई चुनौती
Terrecon ने Suno, Udio, Google Flow Music और Mureka जैसे AI म्यूजिक टूल्स का परीक्षण किया। शोधकर्ताओं का कहना है कि कुछ आपत्तिजनक अनुरोधों को सिस्टम ने रोका, लेकिन अन्य तरीकों से समान गाने बनाए जा सके। इससे AI कंटेंट की मॉडरेशन प्रणाली पर सवाल उठते हैं। इस बीच, Spotify ने AI से बने गानों की पहचान के लिए लेबलिंग नीति लागू करने की योजना बनाई है, जबकि YouTube और Deezer भी AI कंटेंट की पहचान से संबंधित नियम लागू कर रहे हैं।
