रूस-यूक्रेन संघर्ष में परमाणु खतरा: कुर्स्क संयंत्र पर ड्रोन हमला
परमाणु संकट की नई चेतावनी
नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष को लगभग चार साल हो चुके हैं, लेकिन दोनों देश पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। इस बीच, परमाणु आपदा की आशंका फिर से बढ़ने लगी है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने कुर्स्क परमाणु संयंत्र पर हाल ही में हुए ड्रोन हमले के संदर्भ में गंभीर चेतावनी जारी की है। एजेंसी का कहना है कि इस तरह के हमले वैश्विक संकट को जन्म दे सकते हैं।
बच गया बड़ा हादसा
यह घटना कुर्स्क न्यूक्लियर पावर प्लांट की है, जो रूसी सीमा के निकट स्थित है। तड़के एक ड्रोन अचानक एक रिएक्टर यूनिट के कूलिंग टावर से टकरा गया। सौभाग्य से, इस टक्कर के बाद आग नहीं लगी और संयंत्र के संचालन में कोई बाधा नहीं आई। उस समय संबंधित रिएक्टर यूनिट पूरी क्षमता से कार्यरत थी।
IAEA की कड़ी चेतावनी
IAEA के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर कहा कि किसी भी परिस्थिति में परमाणु संयंत्रों को निशाना बनाना अस्वीकार्य है। युद्ध की स्थिति में भी न्यूक्लियर साइट्स पर हमले सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते हैं। ग्रॉसी ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है ताकि किसी संभावित परमाणु दुर्घटना से मानवता को बचाया जा सके। सुरक्षा घेरे के निकट ड्रोन का पहुंचना कई गंभीर सवाल उठाता है, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी भयावह न्यूक्लियर लीक का कारण बन सकती है।
सीमावर्ती क्षेत्र में बढ़ता तनाव
कुर्स्क शहर, जो रूस-यूक्रेन सीमा के पास स्थित है, लगभग 4.4 लाख की आबादी वाला एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इसके पश्चिम में विशाल परमाणु संयंत्र है। फरवरी 2022 से शुरू हुए युद्ध में यह पहला अवसर नहीं है जब किसी न्यूक्लियर प्लांट के आसपास गोलाबारी या ड्रोन गतिविधियां देखी गई हों। IAEA लगातार चेतावनी दे रहा है कि युद्ध क्षेत्र के निकट सक्रिय परमाणु रिएक्टर पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा हैं। यदि इन संवेदनशील स्थलों को समय पर युद्ध से दूर नहीं रखा गया, तो इसके परिणाम पूरे यूरोप के पर्यावरण और जनजीवन के लिए विनाशकारी हो सकते हैं।
