लिकटेंस्टाइन के राजकुमार का भारत दौरा: ऐतिहासिक संबंधों की नई शुरुआत
भारत में लिकटेंस्टाइन का शाही दौरा
भारत में एक विशेष शाही दौरे की चर्चा जोरों पर है। लिकटेंस्टाइन के राजकुमार और राजकुमारी भारत आए हैं। यह देश इतना छोटा है कि नोएडा और चंडीगढ़ जैसे शहर इसकी भौगोलिक सीमाओं को चुनौती दे सकते हैं। केवल 160 वर्ग किलोमीटर में फैले इस देश की जनसंख्या 50,000 से भी कम है। भारत के साथ इसके संबंध 30 वर्षों से अधिक पुराने हैं। इन संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रिंस एलोइस और उनकी पत्नी प्रिंस सोफी 25 से 28 अक्टूबर तक भारत में रहे।
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को हैदराबाद हाउस में लिकटेंस्टाइन के राजकुमार और राजकुमारी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक वार्ता भी हुई। प्रिंस एलोइस और सोफी ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रिंस एलोइस ने कहा कि यह लिकटेंस्टाइन की भारत में पहली राजकीय यात्रा है, जो दोनों देशों के रिश्तों की महत्ता को दर्शाती है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश नवाचार, उन्नत निर्माण, वित्तीय सेवाओं, शिक्षा और तकनीक में सहयोग बढ़ा सकते हैं।
लिकटेंस्टाइन का महत्व
आकार और जनसंख्या में छोटा होने के बावजूद, लिकटेंस्टाइन भारत के लिए महत्वपूर्ण है। प्रिंस एलोइस ने भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए समर्थन देने का आश्वासन दिया है। कई यूरोपीय देशों ने पहले भी भारत के समर्थन में आवाज उठाई है। भारत ने प्रिंस एलोइस का आभार व्यक्त किया है।
लिकटेंस्टाइन की विशेषताएँ
लिकटेंस्टाइन मध्य यूरोप के आल्प्स क्षेत्र में स्थित एक छोटा देश है, जिसका आधिकारिक नाम प्रिंसिपैलिटी ऑफ लिकटेंस्टाइन है। यह ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड के बीच बसा हुआ है। इसकी राजधानी वडूज है और यहां की आधिकारिक भाषा जर्मन है। यह देश 23 जनवरी 1719 को स्थापित हुआ था और 1866 में यह पूरी तरह स्वतंत्र हो गया।
शासन प्रणाली
लिकटेंस्टाइन का क्षेत्रफल 160.5 वर्ग किलोमीटर है और इसकी जनसंख्या 2025 तक लगभग 41,237 होने का अनुमान है। यह एक लैंडलॉक स्टेट है, जो स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया से घिरा हुआ है। यहां 11 नगरपालिकाएं हैं। राजकुमार एलोइस उत्तराधिकारी और रीजेंट की भूमिका में हैं।
यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं
लिकटेंस्टाइन यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है, लेकिन यह शेंगेन क्षेत्र और यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र का हिस्सा है। यह संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय परिषद का भी सदस्य है।
आर्थिक स्थिति
लिकटेंस्टाइन की अर्थव्यवस्था में वित्तीय सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। यहां की सबसे बड़ी नियोक्ता कंपनी हिल्टी है।
सुरक्षा और परिवहन
लिकटेंस्टाइन की अपनी सेना नहीं है और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी राष्ट्रीय पुलिस पर है। यहां कोई हवाई अड्डा नहीं है, और सबसे नजदीकी बड़ा हवाई अड्डा स्विट्जरलैंड का ज्यूरिख है।
भारत-लिकटेंस्टाइन संबंध
भारत और लिकटेंस्टाइन के बीच राजनयिक संबंध 1993 में स्थापित हुए थे। भारत का स्विट्जरलैंड में राजदूत लिकटेंस्टाइन का भी राजदूत होता है।
व्यापारिक संबंध
2025 के पहले आठ महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापार 3.37 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। लिकटेंस्टाइन की कई कंपनियां भारत में काम कर रही हैं।
सांस्कृतिक संबंध
लिकटेंस्टाइन और भारत के बीच सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत हो रहे हैं। हर साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योग कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
