शंघाई ने मातृत्व देखभाल को मुफ्त करने की नई नीति की घोषणा की
शंघाई की नई मातृत्व नीति
(के जे एम वर्मा) बीजिंग, 10 सितंबर - चीन के वाणिज्यिक केंद्र शंघाई ने घटती जन्म दर और बढ़ती बुजुर्ग जनसंख्या की समस्या से निपटने के लिए मातृत्व देखभाल को पूरी तरह से मुफ्त करने का निर्णय लिया है। इस सप्ताह की शुरुआत में, शहर की सरकार ने एक नई नीति लागू की, जिसके तहत गर्भावस्था की जांच, प्रसव और उसके बाद की देखभाल पर होने वाले सभी व्यक्तिगत खर्चों को माफ कर दिया गया है। हांगकांग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, यह नीति केंद्र सरकार की उस पहल से आगे बढ़कर है, जिसमें इस साल के अंत तक देशभर में अस्पताल में प्रसव से जुड़ी बुनियादी सेवाओं को सभी मरीजों के लिए मुफ्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
जनसांख्यिकीय संकट का सामना
चीन यह कदम ऐसे समय उठा रहा है जब गिरती जन्म दर से उत्पन्न जनसांख्यिकीय संकट देश की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि के लिए खतरा बन रहा है। शंघाई के नगर स्वास्थ्य ब्यूरो ने बताया कि अक्टूबर से शहर की चिकित्सा बीमा योजना में शामिल सभी महिलाओं को 4,500 युआन (लगभग 671 अमेरिकी डॉलर) का मातृत्व भत्ता मिलेगा। यदि खर्च इससे अधिक होता है, तो शेष राशि मातृत्व बीमा के तहत कवर की जाएगी।
प्रसव से जुड़ी सेवाओं का खर्च
ब्यूरो ने कहा कि प्रसव पूर्व जांच, अस्पताल में प्रसव और प्रसव के बाद 42 दिनों तक की देखभाल पर होने वाले खर्च की पूरी भरपाई की जाएगी। चीन की केंद्र सरकार ने पिछले साल देशभर में प्रसव के लिए शून्य व्यक्तिगत खर्च वाली नीति लागू करने का वादा किया था, लेकिन यह अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं हो पाई है। देश में घटती जन्म दर, कामकाजी उम्र वाली आबादी में कमी और बढ़ती जीवन प्रत्याशा ने जनसांख्यिकीय दबाव को बढ़ा दिया है।
एक-बच्चा नीति का प्रभाव
इस गंभीर संकट के लिए सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की दशकों पुरानी एक-बच्चा नीति को भी जिम्मेदार ठहराया जाता है। आर्थिक प्रभाव को देखते हुए, चीन ने 2016 में इस नीति को समाप्त कर सभी दंपतियों को दो बच्चे पैदा करने की अनुमति दी थी। इसके बाद भी जन्म दर में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तब चीन ने 2021 में अपनी जनसंख्या नीति में बदलाव करते हुए दंपतियों को तीन बच्चे पैदा करने की अनुमति दे दी, ताकि अधिक बच्चे पैदा करने को लेकर लोगों की हिचकिचाहट कम हो सके।
बुजुर्ग जनसंख्या की वृद्धि
चीन के जनसांख्यिकीय संकट में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी भी शामिल है। वर्ष 2025 के अंत तक, देश में 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की संख्या 32.34 करोड़ पहुंच जाएगी, जो कुल आबादी का 23 प्रतिशत है। नए माता-पिता के लिए अनुकूल माहौल बनाने के उद्देश्य से, केंद्र और स्थानीय सरकारों ने हाल के वर्षों में बच्चों की देखभाल के लिए सब्सिडी और लंबी मातृत्व छुट्टी समेत कई उपाय लागू किए हैं।
