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शी जिनपिंग की नई सैन्य रणनीति: झांग शेंगमिन का पोलित ब्यूरो में प्रवेश

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में हो रहे बदलावों के बीच, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जनरल झांग शेंगमिन को पोलित ब्यूरो में शामिल किया है। यह नियुक्ति चीन की सैन्य व्यवस्था में असाधारण उथल-पुथल और जिनपिंग की सत्ता को केंद्रीकृत करने की रणनीति का संकेत है। इस लेख में हम झांग की पृष्ठभूमि, सैन्य कार्रवाई के प्रभाव और ताइवान तथा अमेरिका के लिए इसके रणनीतिक महत्व पर चर्चा करेंगे। क्या यह बदलाव चीन की सैन्य क्षमता को मजबूत करेगा या कमजोर? जानें इस लेख में।
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चीन की सैन्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के उच्च नेतृत्व में हो रही बर्खास्तगी, भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों और सैन्य अधिकारियों की छंटनी के बीच, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के उपाध्यक्ष जनरल झांग शेंगमिन को कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो में शामिल किया है। यह निर्णय बीजिंग में आयोजित कम्युनिस्ट पार्टी की चार दिवसीय पूर्ण बैठक में लिया गया, जो चीन की सैन्य व्यवस्था में चल रही उथल-पुथल और जिनपिंग की सत्ता को और अधिक केंद्रीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह नियुक्ति इसलिए भी खास है क्योंकि 1994 के बाद किसी नेता को पार्टी कांग्रेस के बीच के कार्यकाल में पोलित ब्यूरो में स्थान दिया गया है।


झांग शेंगमिन की सैन्य पृष्ठभूमि

जनरल झांग शेंगमिन की नियुक्ति को केवल एक सैन्य प्रमोशन के रूप में देखना गलत होगा। झांग ने लंबे समय तक चीनी सेना में अनुशासन और भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों की जिम्मेदारी निभाई है। 2017 में वह सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में शामिल हुए और 2018 से जुलाई 2026 तक पीएलए में भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों के प्रमुख रहे। पिछले वर्ष अक्टूबर में उन्हें CMC का उपाध्यक्ष बनाया गया था। अब पोलित ब्यूरो में उनकी एंट्री ने उन्हें चीन के राजनीतिक और सैन्य प्रतिष्ठान के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक बना दिया है।


सैन्य नेतृत्व में बदलाव का प्रभाव

झांग की नियुक्ति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वह अब पोलित ब्यूरो में चीन की सेना का एकमात्र प्रतिनिधि हैं। इससे पहले सैन्य प्रतिनिधियों को हटाने के कारण पोलित ब्यूरो में सेना की उपस्थिति समाप्त हो गई थी। जिनपिंग ने अब झांग को उस रिक्तता को भरने के लिए आगे किया है।


चीन की सैन्य कार्रवाई और असंतोष

हाल के समय में चीन की सेना में शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई ने पूरी सैन्य व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। नौ जनरलों को कम्युनिस्ट पार्टी से बाहर किया गया है और कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। यह स्पष्ट है कि जिनपिंग किसी भी स्तर पर असंतोष या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं कर रहे हैं।


ताइवान और अमेरिका के लिए रणनीतिक महत्व

इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा रणनीतिक प्रश्न चीन की युद्धक क्षमता और सैन्य निर्णय प्रक्रिया से जुड़ा है। चीन अपनी नौसेना, मिसाइल क्षमता, वायुसेना और युद्ध तकनीक का विस्तार कर रहा है। अमेरिका के साथ उसकी प्रतिस्पर्धा अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य प्रभाव की लड़ाई बन चुकी है।


2027 की पार्टी कांग्रेस और जिनपिंग की चुनौतियाँ

पांचवीं पूर्ण बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि चीन की अगली 21वीं राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस 2027 की दूसरी छमाही में होगी। इस कांग्रेस में अगले पांच वर्षों के लिए राजनीतिक नेतृत्व तय किया जाएगा। जिनपिंग को अब अमेरिकी चुनौती के मुकाबले चीन की ताकत बढ़ाने के साथ-साथ पार्टी और सेना के भीतर किसी भी संभावित शक्ति केंद्र को समाप्त करना है।