शी जिनपिंग की भारत यात्रा: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने की संभावना
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सितंबर में भारत यात्रा की संभावना है, जो ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए होगी। यह यात्रा 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद उनकी पहली यात्रा होगी। इस यात्रा से पहले भारत और चीन के बीच कूटनीतिक बातचीत बढ़ने की उम्मीद है। उच्च-स्तरीय बैठकों का सिलसिला दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस समिट के दौरान द्विपक्षीय बैठक की संभावना है, जिसमें सीमा विवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
| Jul 31, 2026, 13:48 IST
शी जिनपिंग की संभावित यात्रा
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आने की योजना बना रहे हैं। यह उनकी भारत की पहली यात्रा होगी, जो 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद हो रही है, जिसने दोनों देशों के संबंधों को काफी प्रभावित किया था। यह यात्रा 12-13 सितंबर को निर्धारित है और यह भारत-चीन संबंधों के सामान्यीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पूर्वी लद्दाख सीमा पर तनाव के बाद कई वर्षों तक चले सैन्य गतिरोध और कूटनीतिक प्रयासों के बाद यह सुधार संभव हो रहा है। शी जिनपिंग, जो 2013 से चीन के राष्ट्रपति हैं, पहले भी तीन बार भारत आ चुके हैं। उनकी पिछली यात्रा अक्टूबर 2019 में हुई थी, जो 'लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) पर सैन्य टकराव से कुछ महीने पहले की थी, जिसने दोनों देशों के रिश्तों में बड़ा बदलाव लाया था।
कूटनीतिक बातचीत की उम्मीद
सूत्रों के अनुसार, शी जिनपिंग की प्रस्तावित यात्रा से पहले नई दिल्ली और बीजिंग के बीच कूटनीतिक संवाद बढ़ने की संभावना है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के चीन जाने की संभावना है, हालांकि तारीखें अभी तय नहीं हुई हैं। आने वाले हफ्तों में भारत-चीन सीमा मामलों पर 'कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन के लिए वर्किंग मैकेनिज्म' (WMCC) की बैठक होने की उम्मीद है। इसके बाद सीमा विवाद पर दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत होगी। यह बातचीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद पर चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए WMCC के तहत एक नया एक्सपर्ट ग्रुप और वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति बनी थी। यह पहली बैठक होगी, जो इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
उच्च-स्तरीय बैठकों का महत्व
कई वर्षों के तनावपूर्ण रिश्तों के बाद, दोनों पक्षों की ओर से आपसी बातचीत की रफ्तार बनाए रखने के लिए उच्च-स्तरीय बैठकों का सिलसिला एक ठोस प्रयास को दर्शाता है। इस कूटनीतिक पहल का उद्देश्य न केवल LAC पर अनसुलझे मुद्दों को सुलझाना है, बल्कि रणनीतिक भरोसा फिर से स्थापित करना, सीमा पर नए तनाव को रोकना और उन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना भी है जहाँ दोनों देशों के हित समान हैं।
ब्रिक्स समिट में शी की उपस्थिति का महत्व
यदि यह यात्रा होती है, तो ब्रिक्स समिट में शी जिनपिंग की उपस्थिति का महत्व केवल इस समूह तक सीमित नहीं रहेगा। यह लगभग छह वर्षों में उनकी भारत की पहली यात्रा होगी और जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद उनकी पहली यात्रा होगी। इस यात्रा पर सभी की नजरें होंगी क्योंकि समिट के दौरान भारतीय और चीनी नेतृत्व के बीच द्विपक्षीय बैठक की संभावना है। इस बैठक में सीमा विवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और एशिया के सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय रिश्तों में से एक के भविष्य पर चर्चा होने की उम्मीद है। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ उपायों और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य दखल के बाद बढ़ी अस्थिरता जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
