संयुक्त राष्ट्र का ऐतिहासिक निर्णय: बाल विवाह उन्मूलन दिवस की स्थापना
संयुक्त राष्ट्र का महत्वपूर्ण निर्णय
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 4 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय के अनुसार, हर साल 27 नवंबर को 'बाल, अल्पायु और जबरन विवाह उन्मूलन दिवस' के रूप में मनाया जाएगा। यह तिथि भारत के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि 27 नवंबर 2024 को भारत सरकार ने 'बाल विवाह मुक्त भारत' अभियान की शुरुआत की थी।
UN का निर्णय और इसका महत्व
UN का यह निर्णय बाल विवाह, कम उम्र में विवाह और जबरन विवाह को समाप्त करने के उद्देश्य से लिया गया है। भारत ने इस निर्णय पर अपनी सहमति दी है। इस पहल की शुरुआत एक भारतीय, भुवन ऋभु ने की थी। यह समस्या केवल भारत में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, भारत बाल विवाह के मामलों में सबसे आगे है।
UN का प्रस्ताव क्या है?
4 सितंबर 2026 को सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि हर साल 27 नवंबर को 'बाल, अल्पायु और जबरन विवाह उन्मूलन दिवस' मनाया जाएगा। यह प्रस्ताव सिएरा लियोन द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसे भारत सहित 66 से अधिक देशों ने समर्थन दिया। इस दिन, विभिन्न सरकारें, शैक्षणिक संस्थान, धार्मिक संगठन और सामाजिक संगठन मिलकर जागरूकता फैलाएंगे, ताकि 2030 तक बाल विवाह को समाप्त किया जा सके।
इस निर्णय का उद्देश्य
कम उम्र में विवाह लड़कियों के भविष्य के लिए एक बड़ी बाधा है। यह न केवल उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उनके सपनों को भी बाधित करता है। 2030 तक बाल विवाह को समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन इसकी गति अभी भी धीमी है। इसलिए UN ने यह निर्णय लिया कि हर साल एक विशेष दिन मनाकर इस मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
आंकड़ों के माध्यम से बाल विवाह की स्थिति
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की रिपोर्ट के अनुसार, आज भी लगभग 640 मिलियन महिलाएं ऐसी हैं जिनकी शादी 18 वर्ष से पहले हो चुकी है। हर साल लगभग 12 मिलियन लड़कियों का बाल विवाह होता है, जिसमें से हर तीसरा मामला भारत में है। दक्षिण एशिया के देश, जिसमें भारत भी शामिल है, दुनिया के लगभग आधे बाल विवाह मामलों का हिस्सा हैं।
भारत में बाल विवाह की स्थिति
भारत में, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार, 20 से 24 वर्ष की आयु की 20.1% महिलाओं की शादी 18 वर्ष से पहले हो चुकी है। यह आंकड़ा पिछले सर्वेक्षण के 23.3% से थोड़ी गिरावट दर्शाता है।
महत्वपूर्ण घटनाक्रम
- 27 नवंबर 2024: भारत सरकार ने 'बाल विवाह मुक्त भारत' अभियान की शुरुआत की।
- मार्च 2026: भुवन ऋभु ने UN में बाल विवाह उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस की मांग की।
- 4 सितंबर 2026: UN महासभा ने सर्वसम्मति से 27 नवंबर को 'बाल, अल्पायु और जबरन विवाह उन्मूलन दिवस' घोषित किया।
- हर साल 27 नवंबर: यह नया अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाएगा, पहली बार 27 नवंबर 2026 को।
इस मुहिम में शामिल लोग
इस मुहिम की शुरुआत भुवन ऋभु ने की, जो JRC के संस्थापक हैं। सिएरा लियोन की फर्स्ट लेडी डॉ. फातिमा मादा बायो ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाया। भारत सरकार ने भी 2024 में इस दिशा में कदम उठाया।
बाल विवाह समाप्त करने की दिशा में कदम
भारत में बाल विवाह को समाप्त करने के लिए 'बाल विवाह मुक्त भारत' अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत सख्त कानून बनाए गए हैं। लड़कों की शादी की उम्र 21 वर्ष और लड़कियों की 18 वर्ष निर्धारित की गई है। यदि कोई बालिग पुरुष नाबालिग से शादी करता है, तो उसे 2 साल की जेल या 1 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है।
भविष्य की दिशा
27 नवंबर 2026 को और उसके बाद हर साल यह अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाएगा। UN के इस प्रस्ताव के अनुसार, सभी देशों को बाल विवाह समाप्त करने के लिए ठोस योजनाएं बनानी होंगी। भारत में चल रहा 'बाल विवाह मुक्त भारत' अभियान इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है, जिसका लक्ष्य 2029 तक बाल विवाह की दर को 5% से नीचे लाना है।
