संयुक्त राष्ट्र ने पीओके में सुरक्षा स्थिति पर जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की चिंता
(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, 8 अगस्त - संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सुरक्षा की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में भाग लेने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। महासचिव के उप प्रवक्ता फरहान हक ने शुक्रवार को कहा, "महासचिव अपने उच्चायुक्त के कार्यों का समर्थन करते हैं और हमें उम्मीद है कि तुर्क की अपीलों पर ध्यान दिया जाएगा।"
यह टिप्पणी उन्होंने पीओके में हाल के घटनाक्रमों पर महासचिव के रुख के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में की। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने पिछले महीने पीओके में हालात को लेकर चिंता जताई थी।
उन्हें प्रदर्शनकारियों की मौत के मामले में निष्पक्ष और गहन जांच की आवश्यकता पर जोर दिया और पाकिस्तान द्वारा 'संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति' पर प्रतिबंध लगाने तथा उसके नेताओं की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार के उल्लंघन के बारे में भी चिंता व्यक्त की। हक ने कहा, "यह महत्वपूर्ण है कि सभी प्राधिकरण शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अनुमति दें।"
उन्होंने कहा, "अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण किसी को नुकसान पहुंचा है, तो इसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।" पिछले महीने जिनेवा में जारी एक बयान में तुर्क ने क्षेत्रीय चुनावों से पहले पीओके में उत्पन्न अशांति के मद्देनजर शांति बनाए रखने की अपील की थी।
बयान में कहा गया था कि 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव से पहले जून से अब तक कई लोगों की मौत की खबरें आई हैं। मानवाधिकार उच्चायुक्त ने अशांति के कारण हुई सभी मौतों की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग की।
संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति (जेएएसी) ने इन प्रदर्शनों का नेतृत्व किया, जिसमें ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील, कार्यकर्ता और अन्य शामिल हैं। समिति पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने के आरोप में प्रतिबंध लगाया गया है।
बयान में कहा गया था, "हम अधिकारियों से पूरे क्षेत्र में इंटरनेट की सुविधा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं।" इसमें यह भी कहा गया कि मानवाधिकार उच्चायुक्त ने स्थानीय लोगों की मूल समस्याओं और शिकायतों के समाधान के लिए सार्थक और समावेशी राजनीतिक संवाद का आह्वान किया है।
